देश की खबरें | विपणन प्रबंधन से भारतीय शिल्पकारों को उचित मूल्य मिल सकेगा : आदिवासी मामलों के मंत्री

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि भारतीय जीवन शैली काफी कलात्मक एवं सृजनात्मक है, लेकिन भारतीय शिल्पकारों को वैश्विक बाजार में उचित स्थान नहीं मिल पाया है क्योंकि उनमें उचित विपणन प्रबंधन का अभाव है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 जुलाई केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि भारतीय जीवन शैली काफी कलात्मक एवं सृजनात्मक है, लेकिन भारतीय शिल्पकारों को वैश्विक बाजार में उचित स्थान नहीं मिल पाया है क्योंकि उनमें उचित विपणन प्रबंधन का अभाव है।

उन्होंने कहा कि भारत अपने शिल्पकारों का कौशल बढ़ाकर आयातों के बोझ को कम कर सकता है।

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मुंडा ने आईआईएम शिलांग के एपीजे अब्दुल कलाम नीति शोध केंद्र द्वारा हस्तशिल्प पर डिजिटल संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘‘भारत में परंपरागत जीवनशैली काफी कलात्मक एवं सृजनात्मक है। लेकिन विपणन प्रबंधन के अभाव में वैश्विक बाजार में हम अपना स्थान नहीं बना सके।’’

मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में बांस का इस्तेमाल बेहतर गुणवत्ता की अगरबत्ती बनाने में किया जा सकता है, जिसका भारत में मुख्यत: आयात होता है।

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मंत्री के हवाले से जारी बयान में बताया गया, ‘‘हमारे देश में भगवान गणेश की मूर्ति का विभिन्न प्रारूपों में आयात होता है, जबकि हम उन्हें ज्यादा कलात्मक तरीके से बनाने में सक्षम हैं।’’

उन्होंने कहा कि नाखून काटने जैसा छोटा घरेलू उपकरण भी भारत में नहीं बनता है क्योंकि अच्छी गुणवत्ता के स्टील का अभाव है जबकि हमारा देश लौह अयस्क का निर्यात करता है।

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