नयी दिल्ली, 24 सितंबर कई गैर सरकारी संगठनों ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपील की कि वह विदेशी अभिदाय विनियमन (एफसीआरए) संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करें और विचार विमर्श के लिए इसे संसदीय समिति के पास भेज दें।
संसद ने एफसीआरए में संशोधन के लिए बुधवार को विधेयक पारित किया था जिसमें पंजीकरण के लिए गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के पदाधिकारियों की आधार संख्या जमा करना अनिवार्य किया गया है।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून एनजीओ के विरोध में नहीं है और इसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना है।
एनजीओ पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) की कार्यकारी निदेशक पूनम मुटरेजा ने कहा, ‘‘हम राष्ट्रपति से अनुरोध करते हैं वह इस संशोधन विधेयक को वापस भेज दें और इसपर विचार के लिए विशेष समिति बनाई जाए।’’
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इम्पल्स एनजीओ नेटवर्क की संस्थापक हसीना खारबीह ने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक भारत में, एफसीआरए विधेयक, 2020 गैर सरकारी संगठनों के लिए अनुकूल नहीं है। यह संशोधन उनकी स्वतंत्रता को बाधित करेगा और उसके जमीनी काम पर नियंत्रण लगाएगा।’’
संसद ने बुधवार को विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दी जिसमें विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनों के कामकाज में पारदर्शिता के लिए जरूरी प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी एनजीओ के खिलाफ नहीं है और इसका मकसद पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
इस संशोधन विधेयक में एनजीओ के प्रशासनिक खर्च को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है।
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