नयी दिल्ली/इम्फाल, 19 सितंबर मणिपुर में आतंकवादी समूहों के सदस्यों द्वारा सेना की वर्दी पहनकर वसूली करने के मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के मद्देनजर पुलिस ने मंगलवार को फिर से चेतावनी दी कि अपने निहित स्वार्थों के लिए सुरक्षाकर्मियों की वर्दी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि पांचों आरोपी वर्दी पहनकर आम जनता से कथित तौर पर जबरन वसूली कर रहे थे और उनके पास एके और इंसास राइफल समेत घातक हथियार थे, जो पुलिस शस्त्रागार से लूटे गए थे।
रविवार को गिरफ्तार किए गए लोगों में 45 वर्षीय एम. आनंद सिंह भी शामिल है, जो कथित तौर पर कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) न्योन समूह का प्रशिक्षित कैडर है। यह संगठन कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है।
पुलिस ने जुलाई में कड़ी चेतावनी जारी कर लोगों से पुलिस की वर्दी का दुरुपयोग बंद करने को कहा था, क्योंकि ऐसी खबरें आई थीं कि सशस्त्र दंगाई अविश्वास पैदा करने के लिए सुरक्षाकर्मियों की वर्दी पहन रहे थे।
कुछ अल्पसंख्यक समूह पांच लोगों को रिहा कराने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं और इनमें से कुछ समूहों ने 48 घंटे का बंद बुलाया है लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि कानून अपना काम करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि सिंह पर आदतन अपराधी होने का आरोप है और वह पहले भी छह बार जेल जा चुका है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी मामला दर्ज है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर पुलिस ने सभी सुरक्षा प्रतिष्ठानों में यह सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाया है कि उसकी वर्दी का दुरुपयोग न हो और उन्हें निगरानी बढ़ाने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
यह कार्रवाई 12 सितंबर को कांगपोकपी जिले में पुलिस की वर्दी पहने हथियारबंद लोगों द्वारा तीन आदिवासियों की गोली मारकर हत्या करने के लगभग एक सप्ताह बाद हुई है।
बाद में पता चला कि इस वारदात को अंजाम देने वाले लगभग 20 से अधिक हथियारबंद लोगों ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी, जिनका मकसद हिंसा प्रभावित राज्य में केंद्रीय बलों द्वारा जांच के लिए रोके जाने से बचना था।
अधिकारियों ने कहा कि पुलिस को सुरक्षाकर्मियों, खासकर इंडिया रिजर्व बटालियन और मणिपुर पुलिस को ले जाने वाले किसी भी वाहन और उनके पहचान पत्र की जांच करने के लिए भी कहा गया है।
तीन मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 180 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
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