देश की खबरें | अम्फान के सामने डटकर खड़े रहे मैन्ग्रोव के जंगल, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान पर नहीं आने दी आंच

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में मैन्ग्रोव के जंगल ओडिशा के तटीय क्षेत्र में चक्रवाती तूफान अम्फान के महावेग के आगे डटकर खड़े रहे और उन्होंने उस इलाके की सुरक्षा की।

जियो

केंद्रपाड़ा (ओडिशा), छह जून भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में मैन्ग्रोव के जंगल ओडिशा के तटीय क्षेत्र में चक्रवाती तूफान अम्फान के महावेग के आगे डटकर खड़े रहे और उन्होंने उस इलाके की सुरक्षा की।

तूफान ने राज्य के तटीय जिलों में जबरदस्त तबाही मचाई लेकिन केंद्रपाड़ा जिले में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान और आसपास की बस्तियां यहां हरी-भरी और घनी सदाबहार झाड़ियों की वजह से तूफान से बच गए।

यह भी पढ़े | Unlock 1: पंजाब सरकार ने 8 जून से खुलने वाले धार्मिक स्थलों, होटल, शॉपिंग माल्स के लिए जारी की नई गाइडलाइंस, जानें क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद.

तूफान के करीब एक पखवाड़े बाद भितरकनिका के अधिकारियों ने खुशी जताते हुए कहा कि मैन्ग्रोव के जंगल ने तूफान की तेज हवाओं का डटकर मुकाबला किया।

राजनगर मैन्ग्रोव (वन्यजीव) वन संभाग के संभागीय वन अधिकारी बिकास रंजन दास ने कहा कि भितरकनिका में मैन्ग्रोव जंगल के घने पेड़ों की वजह से उद्यान के पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं को तूफान से कोई नुकसान नहीं हुआ।

यह भी पढ़े | हिमाचल प्रदेश में गर्भवती गाय को खिलाया गया विस्फोटक, बुरी तरह घायल हुआ जबड़ा, मालिक ने पड़ोसी पर लगाया आरोप.

राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के गांवों में भी मैन्ग्रोव के घेरे की वजह से मानव बस्तियां भी सुरक्षित रहीं।

यही कारण है कि राष्ट्रीय उद्यान समेत तटीय क्षेत्र पर तूफान का बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा। 1999 में यहां आए चक्रवाती तूफान के समय भी यह इलाका इसी तरह सुरक्षित रहा था। मैन्ग्रोव जंगलों को इन इलाकों में समुद्री ज्वार-भाटे और तूफानों के विरुद्ध जांचा परखा प्राकृतिक अवरोधक माना जाता है।

इन इलाकों के लोगों ने भी इन जंगलों की उपयोगिता को माना है और इस इलाके के संरक्षण के लिए वन विभाग की मदद कर रहे हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\