देश की खबरें | मांडविया ने स्वास्थ्य योजनाओं की व्यापक पहुंच पर दिया जोर

देहरादून, 15 जुलाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सभी स्वास्थ्य योजनाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर शनिवार को जोर दिया ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी नहीं छूट जाए।

मांडविया ने उम्मीद जताई कि यहां आयोजित दो दिवसीय "स्वास्थ्य चिंतन शिविर" में, मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को कैसे बेहतर बनाया जाए, इस पर सुझाव आएंगे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए सभी गांवों में "आयुष्मान ग्राम सभा" का आयोजन किया जाएगा और जो भी गांव सभी योजनाओं का पूरी तरह से विस्तारित करने में सफल होगा, उसे "आयुष्मान ग्राम" घोषित किया जाएगा। .

मांडविया ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य चिंतन शिविर हमें स्वास्थ्य के मामले में अंतिम छोर तक पहुंच के विचार के करीब लाने में मदद करेगा। पिछले दो दिनों में, हमने भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र का मौजूदा विस्तृत अवलोकन देखा है और यह भी देखा कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने के लिए हमें किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।’’

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी-मुक्त भारत अभियान में "लोक भागीदारी" देश में तपेदिक को खत्म करने में काफी मददगार हो सकती है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे लोगों को ‘निक्षय मित्र’ बनने के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित करें।

उन्होंने कहा, ‘‘लोक भागीदारी देश में तपेदिक को खत्म करने के लिए एक बहुत ही आवश्यक गतिविधि है। टीबी उन्मूलन के प्रति हमारा दृष्टिकोण स्वास्थ्य सेवा के प्रति भारतीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। मैं लोगों से निक्षय मित्र बनने के लिए आगे आने का आह्वान करता हूं, क्योंकि इससे काफी मदद मिल सकती है। भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए लंबा रास्ता तय करना है।’’

मांडविया ने राज्यों से टीबी उन्मूलन को प्राथमिकता देने तथा इसे और गति देने का अनुरोध किया। उन्होंने राज्यों से दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करना आसान बनाकर देश की दिव्यांग आबादी का समर्थन करने का भी आग्रह किया।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी के पॉल ने स्वास्थ्य चिंतन शिविर में कहा, "पिछले दो दिनों में, सभी उपस्थित लोगों के सुझाव से स्वास्थ्य सेवा के लिए एक समग्र प्रतिमान बनाया गया है और यह आवश्यक है कि आज हम जो प्रस्ताव पारित करें इसे कार्यान्वित किया जाए, ताकि जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं उन्हें अगले वर्ष तक हासिल किया जा सके।’’

धन सिंह रावत (उत्तराखंड), रजनी विडाडाला (आंध्र प्रदेश), अलो लिबांग (अरुणाचल प्रदेश), केशब महंत (असम), ऋषिकेश पटेल (गुजरात), बन्ना गुप्ता (झारखंड), दिनेश गुंडू राव (कर्नाटक), सपम रंजन सिंह (मणिपुर), डॉ आर लालथ्यांगलियाना (मिजोरम) और टी. एम. सुब्रमण्यम (तमिलनाडु) सहित विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने चिंतन शिविर में भाग लिया।

टी एस सिंह देव (उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़), ब्रजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश), बी एस पंत (पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री, सिक्किम), विश्वास सारंग (चिकित्सा शिक्षा मंत्री, मध्य प्रदेश) और के लक्ष्मी नारायणन (लोक निर्माण मंत्री, पुडुचेरी) ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन, भारत में स्वास्थ्य देखभाल के विभिन्न पहलुओं पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें आयुष्मान भव, राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, खसरा और रूबेला उन्मूलन और गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम भी शामिल हैं।

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