देश की खबरें | व्यापारियों को नकली डीपीसीसी प्रमाणपत्र देने वाला व्यक्ति गिरफ्तार

नयी दिल्ली, 19 अगस्त लोगों को कथित रूप से दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के फर्जी प्रमाणपत्र देकर उन्हें ठगने को लेकर 42 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

उसने बताया कि गिरफ्तार किये गये व्यक्ति की पहचान उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के निवासी मनीष पोद्दार के रूप में की गयी है।

मिठाई की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति ने 23 जुलाई को शिकायत की थी कि उसने नारायण औद्योगिक क्षेत्र में एक नयी कार्यशाला तथा पीतमपुरा में नयी दुकान खोली जिन्हें चलाने के लिए उसे दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के प्रमाणपत्रों की जरूरत थी।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मिठाई दुकानदार ने डीपीसीसी की प्रक्रिया से परिचित होने का दावा करने वाले पोद्दार से भेंट की जिसने उससे 2,01,600 रुपये बतौर ‘फीस एवं परामर्श शुल्क’ लेने के बाद उसे चार प्रदूषण प्रमाणपत्र दिये लेकिन बाद में ये प्रमाणपत्र फर्जी निकले।

विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) रवींद्र यादव ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी ग्रेटर नोएडा के सेक्टर तीन में छिपा है। उन्होंने बताया कि यादव के सटीक ठिकाने का पता लगाने के बाद एक जाल बिछाया गया और पोद्दार को धर दबोचा गया।

यादव के अनुसार पूछताछ के दौरान पोद्दार ने बताया कि वह व्यापारिक एसोसिएशन में जाता है जहां वह ऐसे कई व्यापारियों तथा फैक्टरी/दुकान मालिकों के संपर्क में आया जो आसानी से डीपीसीसी प्रमाणपत्र चाहते थे।

पुलिस ने कहा कि आरोपी ने इसे मौके के रूप में लिया तथा उसने अपने आप को कमीशन एजेंट सह परामर्शदाता के रूप में पेश किया। पुलिस के अनुसार वह इन व्यापारियों को नकली डीपीसीसी प्रमाणपत्र देने लगा ।

पुलिस का कहना है कि अबतक उसने (पुलिस ने) पोद्दार के हाथों ठगे गये छह व्यक्तियों की पहचान की। पुलिस के मुताबिक पोद्दार के पास से 12 नकली डीपीसीसी प्रमाणपत्र, एक लैपटॉप, दो मोबाइल फोन और नकली दस्तावेज जब्त किये हैं।

पुलिस के अनुसार अभियांत्रिकी और एमबीए की पढ़ाई कर चुके पोद्दार ने दिल्ली के नारायणा एवं गुरूग्राम के उद्योग विहार में छोटे उद्योगों को अपशिष्ट शोधन संयंत्र प्रदान करने के लिए अपनी कंपनी शुरू करने के वास्ते बैंक की नौकरी छोड़ी थी।

पुलिस का कहना है कि उसी दौरान वह प्रदूषण प्रमाणपत्रों और उन्हें हासिल करने के तौर तरीकों के बारे में सीख गया तथा उसने डीपीसीसी काम के लिए अपने आप को मध्यस्थ पेश कर लोगों को ठगा।

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