देश की खबरें | अपने को स्वास्थ्य मंत्रालय का अधिकारी बताकर लोगों से 15 करोड़ रुपये ठगने वाला व्यक्ति गिरफ्तार

नयी दिल्ली, 29 दिसंबर खुद को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का अधिकारी बताकर को कोविड टीकों की ढुलाई का आर्डर दिलाने के बहाने छह लोगों को 15 करोड़ रुपये का कथित रूप से चूना लगाने के आरोप में 49 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने आरोपी उमेश बत्रा (49) को गिरफ्तार किया है जो एक निर्माण कंपनी में काम करता था लेकिन लॉकडाउन में उसकी वित्तीय स्थिति डवांडोल हो गयी और वह इस घोटाले के सरगनाओं--हारमेन सभरवाल, गोविंद तुलश्यान और तीन अन्य के साथ मिलकर लोगों को ठगने लगा। उसके अनुसार बाकी लोग भी गिरफ्तार किये जा चुके हैं।

पुलिस ने बताया कि लोगों ने शिकायत की कि कोविड टीकों की ढुलाई का काम दिलाने के बहाने उनसे तीन-चार करोड़ रुपये ठग लिये गये जिसके बाद जांच शुरू की गयी।

पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच के बाद मामला दर्ज किया गया और गहन जांच शुरू की गयी। उसके मुताबिक छह शिकायतकर्ता सामने आये और ठगी गयी राशि कुल 15 करोड़ रुपये निकली।

पुलिस उपायुक्त (ईओडब्ल्यू) एम आई हैदर ने बताया कि जांच से खुलासा हुआ कि मई, 2021 में आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं से संपर्क किया और उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से कोविड टीकों की ढुलाई का काम दिलाने की पेशकश की।

उन्होंने कहा, ‘‘ उनका विश्वास जीतने के लिए आरोपी उन्हें मंत्रालय ले गये जहां निर्माण भवन के परिसर में स्थित है। उन्होंने खुद को मंत्रालय का अधिकारी बताया और काम आर्डर के फर्जी कागजातों पर उनके हस्ताक्षर ले लिये। इन फर्जी काम आर्डर के एवज में आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं से 15 करोड़ रुपये लिये।’’

हैदर ने बताया कि आरोपियों के बैंक खातों एवं अन्य विवरणों को खंगालने से पता चला कि भारी-भरकम राशि जमा करायी गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘बत्रा ने खुद को स्वास्थ्य मंत्रालय का अधिकारी के रूप में पेश किया जो कांफ्रेंस रूम से काम करता है। उसे अन्य आरोपी प्रफुल्ल कुमार नायक इस धंधे में अपने साथ लाया था। बत्रा अपने घर से फरार था और उसका पता लगाने एवं उसे गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापे मारे जा रहे थे और तलाशी की जा रही थी।’’

अधिकारी ने बताया कि 21 दिसंबर को बत्रा ने दिल्ली की एक अदालत में आत्मसमर्पण किया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उनके अनुसार बत्रा ने बताया कि विनोद कुमार शर्मा और विनय गुप्ता भी अपने को मंत्रालय के अधिकारी के रूप में पेश करते थे।

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