नयी दिल्ली, 24 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) तथा अधिवक्ता कल्याण ट्रस्ट से अपने उन सदस्यों को कुछ आर्थिक राहत प्रदान करने की योजना पर काम करने को कहा जो कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं।
उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस के मद्देनजर आर्थिक तंगी से जूझ रहे ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य को 25-25 हजार रुपये की अनुग्रह राशि के भुगतान की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि किसी को सहायता कार्य करने का निर्देश देते हुए आदेश जारी नहीं किया जा सकता और ट्रस्ट तथा बीसीडी को याचिका पर ‘अनुरोध’ की तरह विचार करना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ये आपके अपने सदस्य हैं। क्या किया जा सकता है, संभावनाएं तलाशिए। अनुग्रह राशि देने का मानदंड तय करने पर विचार कीजिए।’’
पीठ ने ट्रस्ट और बीसीडी दोनों से रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने को भी कहा कि उन्होंने अब तक क्या किया है और आने वाले समय में वे क्या करना चाहते हैं।
पीठ ने अगली सुनवाई के लिए सात जुलाई की तारीख तय की।
ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ वकील संजय जैन ने कहा कि उसके पास सीमित राशि है जो कोविड-19 महामारी के दौर में मौजूदा परिस्थितियों में स्टांप की सीमित बिक्री और वकीलों से बहुत कम योगदान मिलने की वजह से बढ़ नहीं रही है।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को राज्य या केंद्र सरकार से निधि नहीं मिलती और इसलिए उसके धन को प्रत्येक सदस्य को 25 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने में नहीं खर्च किया जा सकता है।
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