देश की खबरें | मकरज मामला : केंद्र ने कहा, मीडिया पर रोक के प्रयास से नागरिकों को जानने की स्वतंत्रता नष्ट होगी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात अगस्त केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि मरकज निजामुद्दीन मामले की रिपोर्टिंग रोकने के लिए समूचे मीडिया पर पूर्ण रोक संबंधी आदेश प्राप्त करने के एक मुस्लिम संगठन के प्रयास से लोगों की जानने की स्वतंत्रता प्रभावी रूप से नष्ट हो जाएगी। इसके साथ ही लोगों को सूचना देने का पत्रकारों का अधिकार भी प्रभावित होगा।

सरकार ने कहा कि किसी विशिष्ट समाचार चैनल या एजेंसी द्वारा प्रकाशित या प्रसारित किसी भी आपत्तिजनक समाचार के बारे में कोई विशेष जानकारी के अभाव में संविधान और लागू होने वाले कानून केबल प्राधिकरण नेटवर्क नियमावली के तहत किसी भी प्राधिकरण को एकतरफा आदेश पारित करने का अधिकार नहीं देते हैं।

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने न्यायालय में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि मरकज निज़ामुद्दीन में एक धार्मिक कार्यक्रम से संबंधित "फर्जी समाचार" के प्रसार को रोकने और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए केंद्र को निर्देश दिए जाएं।

जमीअत ने आरोप लगाया है कि तबलीगी जमात की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का इस्तेमाल पूरे मुस्लिम समुदाय को दोषी बनाने के लिए किया जा रहा है। याचिका में मीडिया को इस तरह की रिपोर्टों का प्रकाशन या प्रसारण रोकने का अनुरोध किया गया है।

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मार्च में दिल्ली के मरकज़ निज़ामुद्दीन में तबलीगी जमात कार्यक्रम से कोरोना वायरस के प्रसार में तेजी आने का आरोप लगा था।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने केंद्र के हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया और याचिकाकर्ता को सुनवाई की अगली तारीख 26 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

जमीयत की याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में केंद्र ने कहा, "... मरकज निजामुद्दीन मुद्दे के संबंध में पूरे मीडिया पर पूर्ण ‘प्रतिबंध’ का अनुरोध राष्ट्र में समाज के संबंधित वर्गों के मामलों के बारे में जानने की नागरिकों की स्वतंत्रता और समाज को जानकारी देने का पत्रकार का अधिकार प्रभावी रूप नष्ट हो जाएगा।’’

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