अमरावती, आठ जनवरी जन सेना प्रमुख के. पवन कल्याण ने तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू से रविवार को मुलाकात की और स्पष्ट संकेत दिया कि दोनों पार्टियां आंध्र प्रदेश को वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी शासन को सत्ता से सत्ता से ‘‘हटाकर’’ राज्य में एक ‘‘जवाबदेह शासन’’ लाने के लिए फिर से गठबंधन की ओर बढ़ रही हैं।
हालांकि, दोनों नेताओं ने कहा कि "आंध्र प्रदेश में लोकतंत्र को बचाना" उनका मुख्य उद्देश्य है और (तेदेपा और जन सेना के बीच) संभावित गठबंधन का मुद्दा बाद में आएगा।
दोनों नेताओं ने दो घंटे की बैठक के अंत में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश में स्थिति अभी आपातकाल से भी बदतर है। हम आंध्र प्रदेश में लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी (विपक्षी) ताकतों के साथ काम करेंगे। हम इस मुद्दे को केंद्र के संज्ञान में लाएंगे क्योंकि ऐसी स्थितियों में हस्तक्षेप करने का उसे पूरा अधिकार है।’’
नेताओं ने कहा कि उन्होंने "विस्तृत मुद्दों" पर चर्चा की, जिसमें विवादास्पद जीओ नंबर 1, सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों में कटौती, धान किसानों को लाभकारी मूल्य का भुगतान न करना, विपक्ष पर अंकुश लगाना आदि शामिल हैं।
जन सेना और तेदेपा के बीच संभावित गठबंधन संबंधी एक प्रश्न पर तेदेपा प्रमुख नायडू ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा तब की जा सकती है जब ‘‘लोकतंत्र सामान्य रूप से काम कर रहा हो।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कई संयोजन होंगे। अतीत में, हमने 2009 में (तत्कालीन) तेलंगाना राष्ट्र समिति के साथ गठबंधन किया था। (बाद में) मतभेद हो सकते हैं लेकिन गठबंधन पर केवल तभी चर्चा की जा सकती है जब लोकतंत्र और राजनीतिक दलों को सामान्य रूप से कार्य करने दिया जाए।’’
कल्याण ने कहा कि उन्होंने इस पर "विस्तार से चर्चा की" कि राज्य के भविष्य के लिए क्या करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी के साथ जवाबदेह शासन लाना उनका मुख्य कार्य है। कल्याण ने कहा कि वह अपनी सहयोगी भाजपा के साथ भी इस मुद्दे को उठाएंगे।
जन सेना प्रमुख ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को हराने के लिए 2024 के चुनावों में आंध्र प्रदेश में विपक्ष का वोट विभाजित नहीं हो।
सप्ताहांत में दोनों नेताओं के हैदराबाद पहुंचने के साथ, कल्याण बैठक के लिए नायडू के जुबली हिल्स निवास पर गए। यह दोनों के बीच कई वर्षों के बाद पहली औपचारिक बातचीत थी।
जन सेना वर्तमान में राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन में है, जबकि तेदेपा कभी त्रिपक्षीय गठबंधन की प्रमुख भागीदार थी।
2018 के बाद से, तेदेपा अकेले ही चुनावों में उतर रही है और उसने अन्य दो के साथ संबंध तोड़ दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) परोक्ष तौर पर तेदेपा के साथ फिर से गठबंधन करने को लेकर अनिच्छुक है जबकि जन सेना पूर्व सत्ताधारी पार्टी के करीब जा रही है।
इस पृष्ठभूमि में, नायडू और कल्याण के बीच बैठक महत्व रखती है।
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