मुंबई, 22 जून महाराष्ट्र सरकार ने चीन की तीन कंपनियों के साथ कुल पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के जिन समझौतों पर 15 जून को हस्ताक्षर किये थे, उन पर यथास्थिति रखी जायेगी। महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि याथास्थिति का अर्थ 5,020 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के समझौतों को रद्द करना नहीं है।
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महाराष्ट्र सरकार के इस कदम को लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन की सेना की बीच हुई हालिया झड़प के आलोक में देखा जा रहा है। उक्त झड़प में भारतीय सेना के एक अधिकारी समेत 20 जवान शहीद हो गये।
इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंध तल्ख हो गये हैं। इसके बाद देश में चीन के सामानों का बहिष्कार करने और चीन की कंपनियों के ठेके रद्द करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
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एक आधिकारिक बयान के अनुसार, देसाई ने कहा कि राज्य सरकार वर्तमान स्थिति में परियोजनाओं के बारे में स्पष्ट नीतिगत निर्णय का इंतजार कर रही है।
इन समझौतों पर मैग्नेटिक महाराष्ट्र 2.0 निवेशक शिखर सम्मेलन के तहत पिछले सोमवार को हस्ताक्षर किये गये थे। सैन्य झड़प के कुछ घंटे पहले ही इन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे।
बयान के मुताबिक, 15 जून 2020 को हेंगली इंजीनियरिंग, पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस व फोटॉन के संयुक्त उपक्रम और दी ग्रेट वॉल मोटर्स के साथ हस्ताक्षर किये गये समझौता ज्ञापनों के संबंध में यथास्थिति होगी।
इससे पहले एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि चीन की तीन कंपनियां पुणे जिले के एक औद्योगिक केंद्र तालेगांव में परियोजनाओं में निवेश करने वाली हैं। बयान के अनुसार, वाहन क्षेत्र में हेंगली इंजीनियरिंग को 250 करोड़ रुपये और पीएमआई को एक हजार करोड़ रुपये का निवेश करने वाली थी। इसी तरह ग्रेट वॉल मोटर्स 3,770 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक वाहन कंपनी स्थापित करने वाली थी।
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