मुंबई, 13 अगस्त महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र में एक लाख एकड़ से अधिक वर्ग दो भूमि को ‘फ्रीहोल्ड’ में बदलने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी, जिससे कि वहां रहने वाले लोग पूर्ण मालिक बन जाएंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि मराठवाड़ा के आठ जिलों में लगभग 1.4 लाख एकड़ भूमि को वर्ग दो के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को विकसित करने के इच्छुक लोगों के लिए वर्ग दो का दर्जा एक बाधा थी। वर्ग दो के तहत भूमि पर कब्जा एक सशर्त ‘होल्डिंग’ है जिसमें भूमि व्यक्तियों को विभिन्न कारणों से दी जाती है। इनमें इनाम के तौर पर और धार्मिक ढांचों को उनके रखरखाव के लिए दी जाने वाली भूमि भी शामिल है। अधिकारी ने कहा कि भूमि को ‘फ्रीहोल्ड’ में बदलने की मांग लगभग 60 साल पुरानी है।
उन्होंने बताया कि इस भूमि को ‘फ्रीहोल्ड’ में परिवर्तित करने के मंत्रिमंडल के प्रस्ताव का वर्तमान कब्जाधारियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कब्जाधारियों को इस परिवर्तन के लिए राज्य सरकार को एक निश्चित राशि जमा करानी होगी।
मराठवाड़ा के आठ जिलों में 42,710.31 हेक्टेयर भूमि ‘खिदमतमाश’ (धार्मिक स्थलों के रखरखाव के लिए दी गई) और 13,803.13 हेक्टेयर ‘मदतमाश’ भूमि (पुरस्कार के रूप में दी गई) के रूप में चिह्नित है।
वर्ष 1960 में महाराष्ट्र के गठन के समय, जब मराठवाड़ा क्षेत्र हैदराबाद की तत्कालीन रियासत से अलग होकर राज्य का हिस्सा बन गया, तो ये प्रावधान समाप्त कर दिए गए। राज्य ने इन जमीनों पर नियंत्रण कर लिया।
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने जमीन के हस्तांतरण और इस्तेमाल को लेकर कब्जेदारों पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह मुद्दा करीब 60 साल तक अनसुलझा रहा।
मंत्रिमंडल ने 6,000 किलोमीटर कंक्रीट सड़कों के निर्माण के लिए 36,964 करोड़ रुपये के संशोधित बजट को भी मंजूरी दे दी। इसके अलावा बिजली चालित करघों के लिए बिजली दरों में रियायत के संबंध में आवेदन करने की समयसीमा भी मार्च 2025 तक बढ़ा दी गई है।
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