देश की खबरें | महाराष्ट्र : अलांदी मंदिर में पुलिस के साथ कहासुनी के एक दिन बाद शांतिपूर्वक निकला वरकरियों का जुलूस

पुणे, 12 जून महाराष्ट्र के पुणे जिले के अलांदी स्थित मंदिर के बाहर वरकरियों (भगवान विट्ठल के भक्त) की पुलिस के साथ हुई कहासुनी के एक दिन बाद सोमवार को धार्मिक जुलूस पुलिस, भक्तों और न्यासियों के समन्वय से सुचारु तरीके से गंतव्य की ओर बढ़ रहा है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि रविवार शाम को संत ज्ञानेश्वर महाराज की अलांदी से निकली पालकी और संत तुकाराम महाराज की देहू से निकली पालकी के सोमवार को पुणे शहर पहुंचने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि रविवार को वरकरियों और पुलिस के बीच उस समय कहासुनी हुई जब पुणे से करीब 22 किलोमीटर दूर संत ज्ञानेश्वर महाराज समाधि मंदिर में पंढरपुर तक निकाली जाने वाली अषाढ़ी एकादशी जुलूस के दौरान उन्होंने जबरन मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की।

महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि मंदिर के बाहर पुलिस ने कुछ वरकरियों पर लाठीचार्ज किया था। हालांकि, बाद में राज्य के उप मुख्यमंत्री और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे देवेंद्र फडणवीस एवं स्थानीय पुलिस ने इन दावों को खारिज कर दिया था और कहा था कि महज कहासुनी हुई थी।

पिंपरी चिंचवाड के पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने कहा कि अगर पुलिस रविवार को वरकरियों के एक समूह को समाधि मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोकती तो वहां भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ दोनों पालकियों का जुलूस सुचारु तरीके से आगे बढ़ रहा है। पुलिस, न्यासियों और वरकरियों के बीच अच्छा समन्वय है। परंपरा के अनुसार दोनों पालकियों का पिंपरी चिंचवाड पुलिस ने उस समय स्वागत किया जब वे हमारे न्यायाधिकार क्षेत्र में आए। अब जुलूस पुणे शहर की ओर बढ़ रहा है।’’

चौबे ने कहा कि कहा कि समाधि मंदिर में पिछले साल हुई भगदड़ की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पुलिस, जिला प्रशासन, मंदिर और वरकरियों की बैठक हुई थी और प्रत्येक समूह के 75-75 सदस्यों को जुलूस निकलने के दौरान मंदिर में प्रवेश देने का फैसला किया गया था।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘इन समूहों के प्रमुखों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अपने सदस्यों की संख्या 75 तक सीमित की।’’

उन्होंने कहा कि रविवार को कार्यक्रम पूर्व योजना के अनुसार उचित समन्वय के साथ चल रहा था तभी वरकरी शिक्षा न्यास से 400 से 500 विद्यार्थियों का एक समूह अचानक आया जो मंदिर में प्रवेश के लिए अधिकृत नहीं था और उन्होंने मंदिर में प्रवेश देने की मांग की जिसकी वजह से पुलिस के साथ उनकी कहासुनी हुई।

चौबे ने कहा, ‘‘अगर पुलिस कर्मियों ने उन्हें नहीं रोका होता तो भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।’’

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