देश की खबरें | मदरसे साम्प्रदायिक लोगों की आंखों में खटकते हैं : जमीयत

नयी दिल्ली, छह सितंबर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अरशद मदनी (एएम) नीत समूह और महमूद मदनी (एमएम) की अगुवाई वाले समूह ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि मदरसे ‘साम्प्रदायिक लोगों की आंखों में खटकते हैं” और इन मदरसों को ‘बदनाम’ नहीं किया जाना चाहिए।

संगठन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, जमीयत (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि व्यवस्था को सुधारने की बात अपनी जगह है, लेकिन ‘‘हमें उनकी (सरकार की) मंशा को समझना चाहिए... क्योंकि मदरसे साम्प्रदायिक लोगों की आंखों में खटकते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया, “हमने हमेशा कोशिश की है कि शांति के साथ हमारी धार्मिक संस्थाओं को चलने दिया जाए लेकिन साम्प्रदायिक शक्तियां हमारे अस्तित्व को समाप्त करना चाहती हैं।”

अरशद मदनी ने कहा, “ इस्लामी मदरसों का अस्तित्व देश के विरोध के लिए नहीं बल्कि देश के लिए है। इसका डेढ़ सौ वर्ष का इतिहास गवाह है कि यहां से हमेशा देश के निर्माण का काम हुआ है।”

स्वतंत्र मदरसों खासकर उत्तर प्रदेश के मदरसों के समक्ष मौजूद चुनौतियों के संदर्भ में राष्ट्रीय राजधानी स्थित जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुख्यालय में ‘मदरसों की सुरक्षा’ के विषय पर एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वेक्षण कराने की पृष्ठभूमि में हुई है।

बयान के मुताबिक, इसमें दारुल उलूम देवबंद, नदवतुल उलेमा लखनऊ और मजाहिर उलूम सहारनपुर समेत उत्तर प्रदेश के दो सौ से अधिक मदरसों के संचालक एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बयान के अनुसार, इस बैठक में जमीयत (एमएम) के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने आरोप लगाया, “सरकारें शत्रुतापूर्ण रवैया अपना कर जनता में अराजकता और अशान्ति पैदा करती हैं। इसके साथ ही समुदायों के बीच में अविश्वास की दीवार स्थापित करती हैं जो अत्यंत निंदनीय है।”

उन्होंने कहा, “सरकारों को इस तरह के रवैये से गुरेज करना चाहिए क्योंकि इस देश में मदरसों की एक बहुत ही शानदार और ऐतिहासिक भूमिका है और इसने हमेशा देश के लिए कुर्बानियां दी हैं। आज भी मदरसे देश की सेवा कर रहे हैं। कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।”

महमूद मदनी ने कहा, “ यहां से पढ़कर निकलने वाले लोग जिम्मेदार और देशभक्त होते हैं। मदरसों के लोगों को देश की व्यवस्था का पालन न करने वाला बताना वास्तव में द्वेष पर आधारित है, इसका उचित और प्रभावी जवाब देना आवश्यक है।”

बयान के मुताबिक, बैठक में तीन सूत्रीय प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई जिसमें राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) या किसी और रूप में आधुनिक शिक्षा का सिलसिला मदरसों में शुरू करने को अहम बताया गया।

महमूद मदनी ने बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए 13 सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है जिसमें उनके और अरशद मदनी के साथ-साथ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी आदि शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने पिछले हफ्ते कहा था कि राज्य सरकार ने मदरसों में छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के सिलसिले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अपेक्षा के मुताबिक, प्रदेश के सभी गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण कराने का फैसला किया है और इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा।

विश्व विख्यात इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के कुलपति मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा, “मदरसों की आंतरिक व्यवस्था को ठीक करने पर हमें विचार करना चाहिए। खासकर छात्रावासों आदि से संबंधित व्यवस्था का पालन करने की हर संभव कोशिश की जाए।”

उन्होंने कहा, “अत्याचार करने वालों के इरादों से भी सावधान रहने की जरूरत है।”

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