नयी दिल्ली, 24 जनवरी आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को उप राज्यपाल वीके सक्सेना पर राज्य सरकार को दरकिनार करते हुए मुकदमों की मंजूरी देने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहां राज्य के खिलाफ गंभीर अपराध करने वाले आरोपी आसानी से मुक्त हो सकते हैं। सिसोदिया ने मुख्य सचिव को बुधवार तक ऐसे सभी मामलों की सूची उनके सामने रखने का निर्देश दिया है, जिनमें मंत्री से मंजूरी नहीं ली गई है।
उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार मुकदमों की स्वीकृति देती है। बाद में एक बयान में सरकार ने कहा कि कुछ महीने पहले तक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था।
उसने कहा कि लेकिन कुछ महीनों से मुख्य सचिव ने मंत्री को दरकिनार कर सभी दस्तावेजों को सीधे उपराज्यपाल के पास भेजना शुरू कर दिया।
उप मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, ''उपराज्यपाल ने भी इन सभी मामलों में 'मंजूरी' दी है, हालांकि वह मंजूरी देने वाले प्राधिकारी नहीं हैं। इसलिए, पिछले कुछ महीनों में ऐसे सभी आपराधिक मामलों में अभियोजन के लिए दी गई मंजूरी अमान्य है। जब आरोपी अदालतों में इस बिंदु को उठाएंगे, उन्हें रिहा कर दिया जाएगा।''
उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ''माननीय उप राज्यपाल के हर मामले में निर्वाचित सरकार को दरकिनार करने के अति उत्साह ने एक संकट की स्थिति पैदा कर दी है, जिसमें राज्य के खिलाफ गंभीर अपराध करने वाले कई आरोपी छूट सकते हैं।''
सिसोदिया ने कहा कि उप राज्यपाल ने चुनी हुई सरकार को दरकिनार करते हुए 'अवैध अभियोजन मंजूरियां' जारी की हैं।
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि, ''दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 196 (1) के तहत, कुछ अपराधों के मामले में अभियोजन के लिए राज्य सरकार से वैध मंजूरी एक शर्त है। जिसमें अभद्र , धार्मिक भावनाओं को आहत करना, घृणा अपराध, राजद्रोह, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना और दूसरों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे अपराध शामिल हैं।''
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