इंफाल, तीन जुलाई मणिपुर के पिछले दो महीने से हिंसा प्रभावित रहने के कारण राज्य में आर्थिक गतिविधियां लगभग ठहर सी गई हैं, जिसका सीधा प्रभाव कारोबारी समुदाय पर पड़ा है।
राज्य में कई उद्यमियों ने सोमवार को कहा कि तीन मई को शुरू हुई हिंसा के बाद से कारोबारी समुदाय के अलावा, समाज के सभी वर्ग प्रभावित हुए हैं और उनकी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
पूर्वोत्तर के बाहर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लंबे समय तक सेवा देने के बाद मणिपुर लौटे प्रमुख कारोबारी अब अपने गृह राज्य में समय और पैसा लगाने के फैसले पर अफसोस कर रहे हैं।
आईटी कंपनी एड्डल सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक याइकहोम्बा निंगथेमचा ने कहा, ‘‘अत्यधिक प्रभाव पड़ा है। लगभग हर कोई प्रभावित हुआ है। तीन मई से पहले, जीवन सामान्य था। पिछले कुछ वर्षों में हम प्रगति के पथ पर थे। कारोबार फल-फूल रहे थे, कोविड-19 के प्रभाव से उबरने के बाद लोग रोजमर्रा के जीवन में आगे बढ़ रहे थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद यह (जातीय झड़पें) हुईं। अब हमारा जीवन बदल गया, और लोगों के कारोबार करने का तरीका बदल गया है। असल में, इसने हमें कुछ साल पीछे कर दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सभी सामान्य लेनदेन रुकने के अलावा, इंटरनेट पर निर्भर कारोबार थम गया है। हमें अपने ऋण की अदायगी के लिए इंटरनेट की जरूरत है। उपभोक्ता हमें भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। हम समय पर जीएसटी (माल एवं सेवा कर) का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।’’
निंगथेमचा पिछले 15 वर्षों से बेंगलुरु में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत थे और वह अपना कारोबार शुरू करने के लिए 2018 में अपने गृहनगर लौटे थे।
इंफाल वेस्ट जिला स्थित संगैथेल गांव के रहने वाले एवं शेयर कारोबारी एन संदीप मेइती ने कहा कि कारोबार पूरी तरह से ठप हो गये हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘परिवहन नहीं है, इंटरनेट नहीं है। इंटरनेट के बगैर हम पैसे कैसे भेज सकते हैं? परिवहन के बगैर, बुनियादी ढांचा विकास का कोई कार्य नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि प्रगति नहीं हो रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, उन तक पैसे नहीं पहुंच पा रहे। उनका उपचार प्रभावित हो रहा है। यहां यह बहुत पीड़ादायक स्थिति है। मैं किसी एक समुदाय के बारे में बात नहीं कर रहा। मैं मेइती समुदाय से आता हूं, लेकिन हिंसा मणिपुर में प्रत्येक समुदाय को प्रभावित कर रही है।’’
पूर्वोत्तर के इस राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी।
मणिपुर की कुल आबादी में 53 प्रतिशत हिस्सेदारी मेइती समुदाय की है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहती है। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है, जो मुख्यत: पर्वतीय जिलों में रहते हैं।
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