देहरादून, 27 जनवरी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कहा कि उत्तराखंड में आज से लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत सहजीवन (लिव-इन) संबंध का पंजीकरण राज्य में रहने वाले युगलों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनिवार्य बनाया गया है।
यहां यूसीसी को लागू करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘लिव-इन’ संबंध के पंजीकरण को अनिवार्य बनाए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि यह युगलों की निजता को समाप्त करने का प्रयास है ।
इस संबंध में मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि युवक और युवतियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘लिव-इन’ पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उददेश्य किसी की निजता को समाप्त करना नहीं है बल्कि हमारा मकसद केवल और केवल उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।’’
उन्होंने कहा कि ‘लिव-इन’ संबंध जब खराब होते हैं तो युगलों में मारपीट और हिंसक घटनाएं होने लगती हैं और अनेक बार हत्याएं तक हो जाती हैं।
इस संबंध में उन्होंने 2022 में दिल्ली में हुए श्रद्धा वालकर हत्याकांड का उदाहरण दिया जिसमें उसके साथ ‘लिव-इन’ में रहने वाले युवक आफताब ने उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर कथित तौर पर उसे फ्रिज में छिपा दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा यह भी उददेश्य है कि अब श्रद्धा वालकर जैसी किसी बेटी या बहन के साथ कोई आफताब हैवानियत न कर सके।’’
धामी ने कहा कि पंजीकरण कराने वाले लिव-इन में रह रहे युगलों की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
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