LIVE: 13 जनवरी की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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-जी7 देशों ने चीन पर निर्भरता घटाने के लिए रेयर अर्थ सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर चर्चा की

-शक्सगाम घाटी पर चीन का नया दावा, सड़क निर्माण को बताया "जायज"

-पनडुब्बी डील के करीब पहुंचे भारत और जर्मनी

-'10 मिनट' में डिलीवरी पर सरकार सख्त

ग्रीनलैंड विवाद: जर्मनी ने अमेरिका की सैन्य हमले की आशंका को नकारा

जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की "किसी भी तरह" ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी के बीच कहा है कि उन्हें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का कोई संकेत नहीं मिला है. वाडेफुल ने स्पष्ट किया कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सुलझाना सभी का साझा हित है और नाटो इस दिशा में ठोस योजनाएं विकसित कर रहा है. जर्मनी का मानना है कि सैन्य टकराव के बजाय नाटो के ढांचे के भीतर सहयोग बढ़ाना ही इस समस्या का एकमात्र हल है.

जहां एक ओर डॉनल्ड ट्रंप रूस और चीन की गतिविधियों का हवाला देकर ग्रीनलैंड को कब्जाने की जिद पर अड़े हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस के भीतर से भी उनके खिलाफ स्वर उठने लगे हैं. रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के एक दल ने संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही है. यह प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह कोपेनहेगन का दौरा करेगा ताकि व्यापार और सुरक्षा पर चर्चा की जा सके, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि अमेरिकी संसद अपने सहयोगियों के साथ खड़ी है.

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ग्रीनलैंड की सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि वे किसी भी परिस्थिति में अमेरिकी नियंत्रण को स्वीकार नहीं करेंगे. इस बीच, नाटो और डेनमार्क ने आर्कटिक क्षेत्र में रक्षा बढ़ाने के लिए नए प्रस्तावों पर काम शुरू कर दिया है, ताकि सुरक्षा के उन गैप्स को भरा जा सके जिनका जिक्र ट्रंप बार-बार कर रहे हैं. इस सप्ताह वॉशिंगटन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के राजनयिकों की मार्को रुबियो के साथ होने वाली बैठक इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी.

'10 मिनट' में डिलीवरी पर सरकार सख्त

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने क्विक डिलीवरी सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स को डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं. एनडीटीवी ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि मंत्री ने डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर चिंताओं के बारे में जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो समेत कई एग्रीगेटर्स के अधिकारियों से मुलाकात की.

ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने श्रम मंत्री से मुलाकात के बाद गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव और काम के तनावपूर्ण हालात का मुद्दा उठाने के बाद अपनी मर्जी से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे रोकने का फैसला किया है. समाचार एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, ब्लिंकिट ने पहले ही इस निर्देश पर काम करते हुए अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट में डिलीवरी का वादा हटा दिया है. साथ ही, आने वाले दिनों में दूसरे एग्रीगेटर्स के भी ऐसा करने की उम्मीद है.

10 मिनट डिलीवरी का वादा लंबे समय से विवादों में रहा है. आलोचकों का कहना है कि इससे डिलीवरी पार्टनर्स पर असुरक्षित तरीके से काम करने का दबाव बढ़ता है. 25 दिसंबर को गिग वर्कर्स यूनियनों ने बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था और 31 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी थी. इसके बाद स्विगी और जोमैटो ने डिलीवरी इंसेंटिव बढ़ाए.

पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने उठाया 'बेबी अरिहा' का मुद्दा

भारत और जर्मनी के बीच रक्षा और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के सामने बेबी अरिहा का संवदेनशील मुद्दा उठाया. पांच साल की अरिहा को सितंबर 2021 में बर्लिन में उसके माता-पिता से अलग कर दिया गया था, जब वह केवल सात महीने की थी. उस समय जर्मन अधिकारियों ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था, जो बाद में खारिज हो गया.

हालांकि माता-पिता पर लगे आरोपों को अदालत ने निराधार पाया, अरिहा को अब तक परिवार को नहीं सौंपा गया है. भारतीय नागरिक अरिहा जर्मनी की सामाजिक देखभाल प्रणाली में ही रह रही है. इस मामले को लेकर नई दिल्ली और बर्लिन के बीच कई बार राजनयिक स्तर पर बातचीत हो चुकी है, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया.

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को कहा, भारत इस मुद्दे को अन्य अहम मामलों से अलग नहीं देखता. उन्होंने कहा, "हम हर स्तर पर जर्मन सरकार से इस पर चर्चा कर रहे हैं. हमारा प्रयास है कि अरिहा का पालन-पोषण भारतीय वातावरण में हो-चाहे वह भारतीय समुदाय के साथ समय बिताना हो, त्योहारों में शामिल होना हो या हिंदी सीखने की व्यवस्था करना."

अरिहा की कस्टडी को लेकर चल रहा विवाद अब भारत-जर्मनी संबंधों में एक अहम बिंदु बन गया है. यह मामला पहले भी जर्मन अधिकारियों की भारत यात्रा के दौरान उठाया गया था.

पनडुब्बी डील के करीब पहुंचे भारत और जर्मनी

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के दो दिवसीय दौरे के दौरान भारत और जर्मनी ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया है. इस बीच भारत और जर्मनी कम से कम 9 अरब डॉलर की पनडुब्बी डील पर बात कर रहे हैं.

इस प्रस्तावित समझौते के तहत जर्मनी की थीसनक्रुप मरीन सिस्टम्स भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पनडुब्बियां बनाएगी, जिसमें भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड साझेदार होगी.

नई दिल्ली के लिए यह डील बेहद अहम है क्योंकि इससे उसे जर्मनी की उन्नत रक्षा तकनीक हासिल होगी और वह अपनी पुरानी, रूस निर्मित पनडुब्बी बेड़े को बदल सकेगा. वहीं, बर्लिन के लिए यह समझौता भारत को रक्षा क्षेत्र में रूस पर निर्भरता से दूर करने और एशिया के बड़े बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है.

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, "इस तरह की डील में तकनीकी, वित्तीय और वाणिज्यिक पहलुओं पर चर्चा होती है. ये बातचीत जारी है और सकारात्मक गति बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि हम किस चरण पर हैं."

नई दिल्ली में तालिबान का पहला वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने 2021 में सत्ता में लौटने के बाद पहली बार भारत में अपना वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किया है. तालिबान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी नूर अहमद नूर ने नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (सीडीए) का पद संभाला और भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की. अफगान दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान-भारत संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया.

भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते जुड़ाव का संकेत देता है. भारत ने पिछले साल अक्टूबर में अफगानिस्तान में अपने तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास में अपग्रेड करने की घोषणा की थी.

तालिबान के लिए यह नियुक्ति अहम है क्योंकि वह विदेशों में अपने राजनयिक मिशनों पर नियंत्रण वापस पाने और वैश्विक मान्यता हासिल करने की कोशिश कर रहा है. फिलहाल रूस ही एकमात्र देश है जिसने तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता दी है. भारत के साथ बढ़ता संवाद दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है.

शक्सगाम घाटी पर चीन का नया दावा, सड़क निर्माण को बताया "जायज"

चीन ने सोमवार (12 जनवरी) को शक्सगाम घाटी पर अपना क्षेत्रीय दावा दोहराते हुए कहा कि इस इलाके में बुनियादी ढांचा बनाने की उसकी परियोजनाएं "पूरी तरह उचित" हैं. यह बयान भारत की हालिया आपत्ति के बाद आया है. नई दिल्ली ने कहा था कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है.

बीते सप्ताह भारत ने कहा था कि शक्सगाम घाटी भारतीय भूभाग है और पाकिस्तान द्वारा 1963 में चीन को किया गया तथाकथित हस्तांतरण अवैध और अमान्य है. इस संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने कभी इस समझौते को मान्यता नहीं दी है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा हैं."

चीन के बांध के निर्माण ने बढ़ाई भारत की चिंता

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत "तथाकथित" चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को भी मान्यता नहीं देता, "यह भारतीय भूभाग से होकर गुजरता है, जो कि पाकिस्तान के बलपूर्वक और गैरकानूनी कब्जे में है." एमईए प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत का पक्ष, पाकिस्तान और चीन को कई बार साफ बताया जा चुका है और भारत, शक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत बदलने की चीन की कोशिशों का लगातार विरोध करता रहा है.

बीजिंग में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "आपने जिस क्षेत्र का उल्लेख किया है, वह चीन का है. अपने क्षेत्र में निर्माण करना पूरी तरह उचित है." उन्होंने यह भी कहा कि चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता दोनों संप्रभु देशों का अधिकार है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) स्थानीय विकास को बढ़ावा देने के लिए है.

शक्सगाम घाटी, हुंजा-गिलगित क्षेत्र का हिस्सा है और ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा रहा है. 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुए समझौते के बाद, दोनों देशों को साझा सीमा मिल गई. शक्सगाम घाटी उत्तर की ओर चीन के शिनजियांग प्रांत और पूर्व की ओर सियाचिन ग्लेशियर से लगती है. यह इलाका रणनीतिक तौर पर भारत के लिए बहुत अहमियत रखता है.

कैसे कम होगी रेयर अर्थ के लिए चीन पर बनी निर्भरता, जी7 देशों ने की बैठक

सोमवार (12 जनवरी) को वॉशिंगटन में जी7 देशों और ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया तथा भारत के वित्त मंत्रियों ने रेयर अर्थ मिनरल की सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाने पर चर्चा की. बैठक का नेतृत्व अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने किया, जिसमें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और जेपी मॉर्गन के अधिकारी भी शामिल थे.

रेयर अर्थ के मामले में आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करता भारत

जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कतायामा ने बताया कि देशों के बीच चीन पर निर्भरता तेजी से घटाने पर व्यापक सहमति बनी. उन्होंने श्रम मानकों और मानवाधिकारों पर आधारित बाजार बनाने, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से समर्थन, कर प्रोत्साहन, व्यापार उपाय और न्यूनतम मूल्य निर्धारण जैसे कदम सुझाए.

रेयर अर्थ तत्व क्या होते हैं और क्यों है इनकी इतनी मांग?

जर्मन वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबाइल ने कहा कि यूरोप को खुद सक्रिय होकर कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ानी होगी और रीसाइक्लिंग पर जोर देना होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यह चीन-विरोधी गठबंधन नहीं होना चाहिए, बल्कि यूरोप को अपनी रणनीति तेज करनी होगी. बैठक में मूल्य निर्धारण और नई साझेदारियों पर भी चर्चा हुई, लेकिन कई मुद्दे अभी अनसुलझे हैं.

ट्रंप का सख्त कदम: ईरान से व्यापार करने वालों पर लगेगा 25 फीसदी टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार (12 जनवरी) को एलान किया कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "तत्काल प्रभाव से, जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करता है, उसे अमेरिका के साथ होने वाले किसी भी और सभी व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा. यह आदेश अंतिम और निर्णायक है."

चीन, ब्राजील, तुर्की और रूस जैसे कई बड़े देश ईरान के साथ व्यापार करते हैं. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह टैरिफ सभी व्यापारिक साझेदारों पर लागू होगा या कुछ चुनिंदा देशों पर. इस कदम से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.

ट्रंप की धमकियों और देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच ईरान का दावा, पूरी तरह काबू में आए हालात

ट्रंप का यह फैसला ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और उनके दमन के बीच आया है. रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खमेनेई ने हाल ही में कहा था कि "प्रदर्शनकारी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं."

ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच संवाद का चैनल खुला हुआ है.