गैस रिसाव मामले में एलजी पालीमर्स को एनजीटी जाना होगा: न्यायालय
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नयी दिल्ली, 19 मई उच्चतम न्यायालय ने एलजी पॉलीमर्स से मंगलवार को कहा कि उसके आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित संयंत्र में हुये गैस रिसाव के मामले की जांच के लिये कई समितियां गठित करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश से जुड़े सवालों के बारे में उसे हरित अधिकरण ही जाना होगा।

इस कंपनी ने सात मई को हुये गैस रिसाव के मामले में स्वत: ही कार्यवाही शुरू करने के हरित अधिकरण के अधिकार पर सवाल उठाते हुये यह याचिका दायर की थी।

इस संयंत्र से खतरनाक गैस स्टाइरीन के रिसाव से कम से कम 11 व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी थी और हजारों अन्य इससे प्रभावित हुये थे।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतानागौडार और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने वीडियो कांफ्र्रेन्सिग के माध्यम से एलजी पॉलीमर्स इंडिया प्रा लि की याचिका पर सुनवाई के बाद कंपनी को हरित अधिकरण ही जाने की सलाह दी।

कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि अधिकरण के निर्देशानुसार उसने 50 करोड़ रूपए जमा करा दिये हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कोई कार्यवाही रोकने का प्रयास नहीं कर रहा हूं।’’

उन्होंने कहा कि वह इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही करने और इस हादसे की जांच के लिये कई समितियां गठित करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठा रहे हैं।

रोहतगी ने कहा कि राज्य के उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के दौरान विस्तार से सारे पहलुओं पर विचार किया था। उन्होंने कहा कि इस हादसे के संबंध में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सहित कई मंचों ने समितियां गठित की हैं।

पीठ ने इस मामले को आठ जून के लिये सूचीबद्ध करते हुये एलजी पॉलीमर्स को रहित अधिकरण जाने की छूट प्रदान की।

इस अधिकरण ने गैस रिसाव के हादसे का संज्ञान लेते हुये कंपनी पर 50 करोड़ रूपए का अंतरिम जुर्माना लगाया था और इस मामले में केन्द्र तथा अन्य से जवाब मांगा था।

यही नहीं, अधिकरण ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी शेषशयना रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच दल गठित किया था जिसे 18 मई से पहले अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिये कहा था।

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