नयी दिल्ली, 30 दिसंबर राष्ट्रीय राजधानी में बिजली व्यवस्था के लिए एक संभावित साइबर हमले के खतरे को देखते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बिजली संसाधनों और संबंधित कंप्यूटर संसाधनों की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (सीआईआई) को ‘संरक्षित प्रणाली’ घोषित करने के लिए एक अधिसूचना को मंजूरी दे दी है।
इन 'संरक्षित प्रणालियों' तक पहुंचने के लिए बिजली संस्थाओं द्वारा लिखित में अधिकृत व्यक्ति को भी अधिसूचना के माध्यम से सूचित किया जाएगा।
उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ से एक बयान में कहा गया, “यह सुनिश्चित करेगा कि शहर में बिजली के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को किसी भी तरह के हमले या अतिक्रमण से बचाया जाए।”
उल्लेखनीय है कि 2020-2021 में केंद्र की साइबर सुरक्षा निगरानी एजेंसियों ने बिजली व्यवस्था के संचालन को बाधित करने के उद्देश्य से कुछ साइबर हमले के प्रयास देखे थे।
बिजली मंत्रालय ने एहतियाती कदम उठाने के लिए आठ मार्च, 2021 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था।
मंत्रालय ने तब बताया था कि साइबर हमलावर तेजी से बिजली क्षेत्र को निशाना बना रहे हैं, इसलिए निवारक उपाय करने और भारतीय विद्युत प्रणाली की सुरक्षा के लिए खतरों को कम करने के वास्ते सभी बिजली क्षेत्र धारकों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
एलजी द्वारा अनुमोदित अधिसूचना सूचना सुरक्षा प्रथाओं और प्रक्रियाओं, और पहुंच नियंत्रण सहित कुछ निगरानियों को लागू करने में मदद करेगी।
बयान में कहा गया है कि वे सुनिश्चित करेंगे कि बिजली कंपनियों - दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल), स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी), और डिस्कॉम - टीपीडीडीएल, बीआरपीएल और बीवाईपीएल- के कंप्यूटर संसाधन को हर तरह से सुरक्षित किया जाए।
इन सुविधाओं के कंप्यूटर संसाधन ‘महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना’ या सीआईआई की श्रेणी में आते हैं, जिसके विनाश या अक्षमता का राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
अब जारी होने वाली अधिसूचना इन सुविधाओं द्वारा विशेष रूप से पहचाने गए व्यक्तियों को अधिकृत करेगी और दिल्ली सरकार के बिजली विभाग द्वारा उन्हें अनुमोदित किया जाएगा।
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