देश की खबरें | कानूनी विशेषज्ञों ने औपनिवेशिक युग के कानूनों को बदलने के केंद्र के कदम का स्वागत किया

नयी दिल्ली, 11 अगस्त औपनिवेशिक युग के कानूनों - भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम- को बदलने के लिए लोकसभा में तीन विधेयक पेश करने के केंद्र के शुक्रवार के कदम का कानूनी विशेषज्ञों ने स्वागत किया।

विशेषज्ञों ने, हालांकि उन्हें हिंदी में नाम देने को लेकर अपनी आपत्तियां व्यक्त कीं।

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) आर.एस. सोढ़ी ने कहा कि भारत एक “विकासशील और जीवंत समाज” है जिसमें कोई भी स्थिर कानून नहीं रख सकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और विकास पाहवा ने कहा कि ये कानून औपनिवेशिक युग के “अप्रचलित कानून” थे और उन्हें समाप्त करने की आवश्यकता थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, ‘‘इन कानूनों के नामों को हालांकि हिंदी शब्दों से बदलना उस न्यायिक प्रणाली में “पूरी तरह से अर्थहीन” है, जो ज्यादातर अंग्रेजी में चलती है।’’

ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए कानूनों के खिलाफ एक प्रमुख आवाज रहे वकील जे. साई दीपक ने कहा कि उन्होंने, हालांकि विधेयकों का अध्ययन नहीं किया है, लेकिन उन्हें खुशी है कि कम से कम इन कानूनों के नाम बदल दिए गए हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में ब्रिटिशकालीन आईपीसी, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने के लिए तीन नये विधेयक पेश किये और कहा कि अब राजद्रोह के कानून को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है।

शाह ने सदन में भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक, 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 पेश किये। ये क्रमशः भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेंगे। उन्होंने कहा कि त्वरित न्याय प्रदान करने और लोगों की समकालीन आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को ध्यान में रखने वाली एक कानूनी प्रणाली बनाने के लिए ये परिवर्तन किए गए।

सरकार के कदम पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सोढ़ी ने कहा कि जहां भी बदलाव की जरूरत है, उसे लाया जाना चाहिए और जो भी कानून समाज की भलाई के लिए है उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘एक जीवंत समाज में, कानूनों को भी बदलना होगा। आपके पास स्थिर कानून नहीं हो सकते।’’

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