नयी दिल्ली, 24 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने वकीलों के लिये 20 लाख रुपए का ऋण और महामारी के मद्देनजर ब्याज माफ करने के लिये याचिका दायर करने वाली वकीलों की एक संस्था से बृहस्पतिवार को उसका परिचय मांगा।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने याचिकाकर्ता 'सुप्रीम कोर्ट आर्ग्युइंग काउंसिल एसोसिएशन' की ओर से पेश वकील वरिन्दर कुमार शर्मा से इस संगठन, इसके सदस्यों और इसके पदाधिकारियों के चुनाव आदि के बारे में सवाल किये।
पीठ ने कहा, ‘‘हम आपकी मंशा पर सवाल नहीं कर रहे हैं लेकिन हम इस एसोसिएशन के बारे में जानना चाहते हैं। आप एक हलफनामा दाखिल करें जिसमें प्रत्येक विवरण हो। इसके बाद हम इस पर गौर करेंगे।’’
शर्मा ने कहा कि वह इस बारे में एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर देंगे।
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इस पर पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के वकील को हलफनामा दाखिल करने के लिये एक सप्ताह का समय दिया जाता। इसके बाद इसे सूचीबद्ध किया जाये।’’
एसोसिएशन ने अपील याचिका में कहा है कि शीर्ष अदालत में 10 साल से ज्यादा समय से वकालत करने वाले वकील उसके सदस्य हैं और वास्तव में तमाम मुकदमों की फाइलें इन्हीं के पास होती हैं।
याचिका में कहा गया है, ‘‘ये (सदस्य) देश के दूसरे हिस्सों से यहां आये और उन्होंने मकान और कार्यालय खरीदने के बाद अपनी वकालत शुरू की है। इन्होंने अपने कार्यालय और घरों के लिये कर्ज लिये हैं। मौजूदा महामारी की वजह से पिछले छह महीने से अदालतों का सामान्य कामकाज निलंबित है और निकट भविष्य में सुचारू रूप से इसके शुरू होने की उम्मीद नहीं है।’’
इसमें कहा गया है कि इस वजह से एसोसिएशन के सदस्य वकील अपने कार्यालय और आवास के ऋण की किस्त अदा करने की स्थिति में नहीं हैं।
अनूप
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