सरकारी अस्पताल में कोरोना के मरीज के इलाज के लिये दायर याचिका में अहम तथ्यों की कमीः अदालत
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई करते हुए, याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने कोई और याचिका यूं ही दायर की तो अदालत का वक्त ज़ाया करने के लिए उनपर जुर्माना लगाया जाएगा।
नयी दिल्ली, 19 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित और अन्य गंभीर रूप से बीमार लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करने और उन्हें पर्याप्त इलाज मुहैया कराने के वास्ते आप सरकार को निर्देश देने के लिए दायर जनहित याचिका में अहम तथ्यों की कमी है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई करते हुए, याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने कोई और याचिका यूं ही दायर की तो अदालत का वक्त ज़ाया करने के लिए उनपर जुर्माना लगाया जाएगा।
याचिकाकर्ता, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता बेजॉन कुमार मिश्र ने अपनी याचिका वापस ले ली और कहा कि वह सामग्री के साथ एक बेहतर याचिका दायर करेंगे।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, “कुछ दलीलों के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी। हम पाते हैं कि इसमें मामले के गुण-दोष को प्रभावित करने वाले अहम तथ्यों का अभाव है। उन्होंने कहा कि वह अहम तथ्यों के साथ एक बेहतर याचिका दायर करेंगे।“
अदालत ने कहा कि लिहाजा याचिका वापस लेने की इजाजत के साथ खारिज की जाती है।
पीठ ने कहा, “हम साफ कर दें कि अगर याचिकाकर्ता ने यूं ही कोई दूसरी याचिका दायर की तो अदालत का समय व्यर्थ करने के लिए उनपर जुर्माना लगाया जाएगा।”
याचिका में आरोप लगाया गया था कि ऐसी कई घटनाएं हैं कि कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज को किसी न किसी बहाने से सरकारी अस्पताल में भर्ती करने से इनकार किया जा रहा है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 19, 2020 03:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

