जरुरी जानकारी | कोविड-19 का दबाव: रिजर्व बैंक ने कंपनियों, व्यक्तिगत कर्ज के एकबारगी पुनर्गठन की अनुमति दी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कोविड- 19 के कारण वित्तीय तंगी झेल रही कंपनियों, छोटे उद्योगों और खुदरा कर्जदारों को बड़ी राहत देते हुये रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को बैंकों को उनके कर्ज का एकबारगी पुनर्गठन करने की अनुमति दे दी।
मुंबई, छह अगस्त कोविड- 19 के कारण वित्तीय तंगी झेल रही कंपनियों, छोटे उद्योगों और खुदरा कर्जदारों को बड़ी राहत देते हुये रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को बैंकों को उनके कर्ज का एकबारगी पुनर्गठन करने की अनुमति दे दी।
उद्योग जगत काफी समय से कर्ज के एक बारगी पुनर्गठन की मांग कर रहा था।
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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि यह पुनर्गठन रिजर्व बैंक के 7 जून 2019 को जारी मितव्ययी रूपरेखा ढांचे के अनुरूप होगा।
रिजर्व बैंक ने इसके साथ ही जाने माने बैंक के वी कामत की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति के गठन की भी घोषणा की है। यह समिति कंपनियों के कर्ज पुनर्गठन के समय ध्यान में रखे जाने वाले विभिन्न मानदंडों के बारे में अपनी सिफारिश देगी।
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रिजर्व बैंक ने विकासात्मक और नियामकीय नीतियों पर जारी अपने वक्तव्य में कहा है, ‘‘वास्तविक क्षेत्र की गतिविधियों के पुनरूत्थान और कर्जधारक पर पड़े प्रभाव को कम करने की मंशा के साथ यह निर्णय लिया गया है कि एक सुविधा खिड़की उपलब्ध कराई जाये ... जिसमें कर्जदाता को पात्र कंपनियों के कर्ज के मामले में स्वामित्व में बदलाव किये बिना ही एक समाधान योजना को अमल में लाने की सुविधा हो और व्यक्तिगत कर्ज का समाधान हो सके। इसके जरिये कुछ शर्तों के साथ इस तरह के कर्ज को मानक रिण के तौर पर वर्गीकृत किया जा सकेगा। ’’
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के परिणाम की घोषणा करते हुये कहा, ‘‘इस समाधान खिड़की सुविधा को उपलब्ध कराने के पीछे जो मूल भावना भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती को बनाये रखना है।’’
बैंकरों ने भी महामारी के प्रभाव के चलते दबाव में आये कई कर्जो के एकबारगी पुनर्गठन पर जोर दिया था। भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने भी इस संबंध में रिजर्व बैंक को सिफारिश दी थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह कहा था कि सरकार कोविड- 19 से प्रभावित उद्योग की मदद के लिये कर्ज के पुनर्गठन की आवश्यकता को लेकर रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रही है।
सीतारमण ने कहा था, ‘‘ध्यान पुनर्गठन पर है। इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक के साथ सक्रियता से काम कर रहा है। सैद्धांतिक तौर पर इस विचार पर गौर किया गया है कि पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ सकती है, इस बात पर ध्यान दिया गया है।’’
रिजर्व बैंक ने कहा है कि इस सुविधा के तहत केवल उन्हीं कर्जदारों को समाधान उपलब्ध होगा जो कि कोविड-19 के कारण मुश्किल में हैं।
रिण पुनर्गठन की इस योजना के तहत केवल वही कर्ज खाते पात्र होंगे जो कि एक मार्च 2020 को मानक खाते के तौर पर वर्गीकृत होंगे और वह किसी भी रिणदाता संस्थान के साथ 30 दिने से अधिक समय से किसी तरह के कर्ज डिफाल्ट में नहीं होंगे।
केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि इस समाधान योजना का इस्तेमाल 31 दिसंबर 2020 तक कभी भी किया जा सकता है और इस्तेमाल करने के दिन के 180 दिन के भीतर इसपर अमल कर लेना होगा।
रिणदाता बैंकों को पुनर्गठन समाधान योजना के बाद के कर्ज पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रावधान करना होगा।
रिजर्व बैंक ने कहा कि व्यक्तिगत कर्जों के पुनर्गठन मामलों के लिये एक अलग रूपरेखा तैयार की जा रही है। केन्द्रीय बैंक ने कहा, ‘‘इस रूपरेखा के तहत व्यक्तिगत कर्ज की समाधान योजना का लाभ 31 दिसंबर 2020 तक लिया जा सकेगा और लाभ लेने के बाद 90 दिन के भीतर उसे अमल में लाना होगा।’’
रिजर्व बैंक ने इससे पहले फरवरी में जीएसटी में पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के मानक खातों में संपत्ति वर्गीकरण को नीचे किये बिना ही एकबारगी पुनर्गठन की सुविधा दी थी। यह सुविधा उन एमएसएमई को दी गई जो कि एक जनवरी 2020 को चूक में थे। यह कदम बजट घोषणा के अनुरूप उठाया गया था।
दास ने कहा कि दबाव झेल रहे एमएसएमई कर्जदारों के खाते यदि मानक खातों के तौर पर वर्गीकृत हैं तो वह भी रिण पुनर्गठन के पात्र होंगे।
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि रिजर्व बैंक ने उन खातों के मामले में पुनर्गठन सुविधा के लिये कोई रास्ता निकाला है जिनमें रिण पुनर्गठन को लेकर समस्या आ रही थी। कुमार ने कहा, ‘‘बड़ी कंपनियों, छोटे उद्यमों और व्यक्तिगत कर्ज के मामले में हर वर्ग के लिये जरूरी सुरक्षोपायों के साथ कोविड- 19 से जुड़े दबाव के समाधान के लिये एक नई रूपरेखा शुरू की गई है, हम इसका स्वागत करते हैं।’’
इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ पदमजा चुंदुरू ने कहा कि रिजर्व बैंक ने एक बेहतर कदम उठाया है इसमें न केवल कंपनियों के दबाव का समाधान किया गया है बलकि एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र पर भी ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘बैंकों को पुनर्गठन जरूरतों के आकलन में कुछ लचीलापन चाहिये था और मुझे लगता है वह अब मिल गया है।’’
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