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आईसीएमआर-एनआईसीईडी द्वारा दी गईं कोविड-19 किटों में खामी है: पश्चिम बंगाल सरकार

सरकार ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि ये किट ‘‘अनिर्णायक परिणाम’’ दर्शाती हैं जिसके कारण पुष्टि के लिए बार-बार जांच करनी पड़ती है और बीमारी का पता लगाने में देरी होती है।

आईसीएमआर-एनआईसीईडी द्वारा दी गईं कोविड-19 किटों में खामी है: पश्चिम बंगाल सरकार
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कोलकाता, 20 अप्रैल पश्चिम बंगाल सरकार ने आरोप लगाया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की नोडल एजेंसी एनआईसीईडी ने राज्य में कोविड-19 संबंधी जांच के लिए जिन किट की आपूर्ति की है, वे ‘‘जाहिर तौर पर खराब’’ हैं।

सरकार ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि ये किट ‘‘अनिर्णायक परिणाम’’ दर्शाती हैं जिसके कारण पुष्टि के लिए बार-बार जांच करनी पड़ती है और बीमारी का पता लगाने में देरी होती है।

आईसीएमआर-एनआईसीईडी के प्राधिकारियों ने कहा कि इसका कारण संभवत: यह हो सकता है कि इन किट का ‘‘मानकीकरण नहीं किया गया है’’ और वह मामले को ‘‘बहुत गंभीरता से ले रहा’’ है।

पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस से अब तक 276 लोग संक्रमित हो चुके हैं जिनमें से 12 लोगों की मौत हो गई है।

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ट्वीट किया, ‘‘आईसीएमआर-एनआईसीईडी, कोलकाता द्वारा दी गई जाहिर तौर पर त्रुटिपूर्ण इन जांच किटों ने बड़ी संख्या में अनिर्णायक परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं जिसके कारण पुष्टि के लिए बार-बार जांच करनी पड़ती है और इससे अंतिम जांच रिपोर्ट देने में देरी होती है।’’

उसने कहा, ‘‘बार-बार जांच करने से ऐसे समय में देरी हो रही है और अन्य समस्याएं आ रही हैं जब हम वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं।’’

उसने कहा कि आईसीएमआर इस मामले का तत्काल संज्ञान ले।

विभाग ने दावा किया कि यह समस्या केवल राज्य की सरकारी प्रयोगशालाओं में ही नहीं, बल्कि देश की अन्य प्रयोगशालाओं में भी आ रही है।

उसने कहा कि जब राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने जांच किट सीधे उसे दी थी तब इस प्रकार की कोई समस्या नहीं आई थी।

एनआईसीईडी निदेशक शांता दत्ता ने संपर्क करने पर इस बारे में कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उचित परिणाम देने के लिए जांच किट का मानकीकरण नहीं किया गया। हर मेडिकल कॉलेज के लिए उनका मानकीकरण करना मुश्किल है और इसलिए विभिन्न एवं अनिर्णायक परिणाम आ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि आईसीएमआर इस मामले को ‘‘बहुत गंभीरता से ले’’ रहा है।

दत्ता ने कहा कि पहले एनआईवी ने अपनी प्रयोगशाला में इस किट का मानकीकरण किया था और इसे वीआरडीएल (विषाणु अनुसंधान एवं नैदानिक प्रयोगशालाओं) को सीधे वितरित किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘किट की मांग बढ़ने पर एनआईवी के लिए उनकी आपूर्ति करना मुश्किल हो गया जिसके बाद आईसीएमआर ने तैयार किट खरीदनी शुरू कर दीं और देश के 16 डिपो के जरिए इन्हें वीआरडीएल को दिया।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 20, 2020 04:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).