नयी दिल्ली, 22 जून कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर कंपनियों के पास पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिये जमा राशि व डिबेंचर का एक हिस्सा आरक्षित पुनर्भुगतान कोष में रखने के नियम के अनुपालन से तीन महीने की और छूट दे दी है।
महामारी के कारण नकद धन की कमी से जुझ रही विभिन्न कंपनियां सरकार से पलगातार इस राहत की मांग कर रही थीं।
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अब कंपनियां सुरक्षित डिबेंचर के 15 प्रतिशत के बराबर राशि को 30 सितंबर तक जमा कर सकती हैं। इसके अलावा कंपनियां अब परिपक्व हो रही जमा राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा भी आरक्षित पुनर्भुगतान कोष में 30 सितंबर तक जमा कर सकती हैं। पहले इन दोनों आवश्यकताओं के अनुपालन की समयसीमा 30 जून को समाप्त हो रही थी।
कंपनी अधिनियम को लागू करने वाले कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक परिपत्र में कहा कि वह दो आवश्यकताओं के अनुपालन के लिये समयसीमा को 30 जून से 30 सितंबर तक बढ़ा रहा है। उसने कहा, "कोविड-19 महामारी के मद्देनजर इन आवश्यकताओं के अनुपालन के लिये समय बढ़ाने के विभिन्न हितधारकों से प्राप्त अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए यह किया जा रहा है।’’
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अधिनियम के तहत, किसी कंपनी को संबंधित वित्त वर्ष में परिपक्व हो रही जमा राशि का कम से कम 20 प्रतिशत हर साल 30 अप्रैल को या उससे पहले किसी अनुसूचित बैंक में 'जमा पुनर्भुगतान आरक्षित खाते' के रूप में जमा कराना होता है।
इसके अलावा एक अन्य राहत डिबेंचर के 15 प्रतिशत के बराबर राशि को जमा करने या निवेश करने से संबंधित है। इस आवश्यकता के तहत सुरक्षित डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी को वर्ष के दौरान परिपक्व होने वाले अपने डिबेंचर की राशि का 15 प्रतिशत निवेश या जमा करना होता है। यह हर साल 30 अप्रैल को या उससे पहले किया जाना होता है।
नांगिया एंडरसन एलएलपी के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि मंत्रालय ने जमा पुनर्भुगतान भंडार से संबंधित अनुपालन की समयसीमा को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। इससे कंपनियों को अगले सप्ताह सामने आने वाले अनुपालन को पूरा करने के लिये राहत मिली है। उन्होंने कहा, "समयसीमा का विस्तार एक स्वागत योग्य कदम है जो व्यवसायों को अपने मुख्य कार्यों को फिर से खोलने और फिर से स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करने की सहूलियत देगा।"
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