नयी दिल्ली, 10 अगस्त कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने एक नयी पुस्तक में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) से जुड़े इतिहास एवं राजनीति पर प्रकाश डाला है और इस विवादित मुद्दे के दो विपरीत पहलुओं को सामने रखा है।
सीएए को पिछले साल 11 दिसंबर को संसद में पारित किया गया था और उस समय सत्तापक्ष एवं विपक्ष की तरफ से इस पर विस्तृत चर्चा हुई थी।
‘द सिटिजनशिप डिबेट’ नामक इस पुस्तक में मालवीय की दलील है कि सीएए को गलत ढंग से लिया गया, जबकि खुर्शीद का कहना है कि यह मामला गलत दिशा से जुड़ा है।
मालवीय ने आरोप लगाया, ‘‘सीएए को लेकर हुई पूरी बहस और हिंसक प्रदर्शन एवं दंगे भाजपा सरकार को असहज करने और देश में डर एवं बेचैनी का माहौल पैदा करने के लिए एक राजनीतिक योजना के तहत हुए थे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि यह न सिर्फ विपक्ष की पुरानी तरकीब या पाखंड है, बल्कि यह एक राजनीतिक खेल है जो लोकतांत्रिक भारत की हर बुनियाद के लिए खतरा पैदा करता है।
मालवीय के मुताबिक, सीएए संविधान की मूल भावना के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उस मूल भावना को निखार रहा है जो भारतीय तानेबाने को मजबूती प्रदान करेगा।
दूसरी तरफ, खुर्शीद का मानना है कि ‘सीएए एक शरणार्थी कानून को नागरिकता कानून में समाहित करने का अस्पष्ट प्रयास है तथा इस अधिनियम के दायरे में कुछ धार्मिक समूहों अथवा देशों को लाने का कोई ठोस आधार नहीं दिया गया है।
मालवीय ने कहा कि यह कहना गलत है कि सीएए ‘हिंदू राष्ट’ की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह उस नीति की दिशा में कदम है जो तुष्टीकरण की राजनीति को खारिज करती है।’’
खुर्शीद का कहना है, ‘‘सवाल धर्म के आधार पर नागरिकता को लेकर है।’’
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