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देश की खबरें | खेलो भारत नीति: क्या आईओए और एनएसएफ को मंजूर होंंगी नियामक संस्थाएं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के खेल प्रशासन पर सरकार कड़ी नजर रख सकती है क्योंकि नई खेलो भारत नीति का उद्देश्य "नैतिक प्रथाओं" को सुनिश्चित करने और देश को 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार करने के लिए "राष्ट्रीय स्तर के नियामक निकाय और अंतर-मंत्रालयी समितियां" बनाना है।

देश की खबरें | खेलो भारत नीति: क्या आईओए और एनएसएफ को मंजूर होंंगी नियामक संस्थाएं

नयी दिल्ली, एक जुलाई भारत के खेल प्रशासन पर सरकार कड़ी नजर रख सकती है क्योंकि नई खेलो भारत नीति का उद्देश्य "नैतिक प्रथाओं" को सुनिश्चित करने और देश को 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार करने के लिए "राष्ट्रीय स्तर के नियामक निकाय और अंतर-मंत्रालयी समितियां" बनाना है।

यह 20 पृष्ठों का यह दस्तावेज पीटीआई के पास उपलब्ध है। इसके अनुसार भारतीय खेल पारिस्थितिकी तंत्र में संरचनात्मक परिवर्तनों का मार्गदर्शक बल होगा और इसमें "मजबूत पेशेवर खेल प्रशासन" के लिए एक विस्तृत योजना शामिल है।

इसमें कहा गया है कि 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करने के भारत के प्रयास को देखते हुए खेल प्रशासन में सुधार आवश्यक होगा। भारत ओलंपिक मेजबानी के लिए पहले ही अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के पास आशय पत्र जमा कर चुका है।

नीति में कहा गया है, "ओलंपिक 2036 के लिए भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को तैयार करने के उद्देश्य से, यदि आवश्यक हुआ तो प्रशासन के लिए कानून सहित अपेक्षित नियामक ढांचा स्थापित किया जाएगा।’’

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक संसद में पेश करने के लिए पहले से ही तैयार है तथा एक खेल विधेयक का मसौदा भी संसद द्वारा पारित किए जाने की प्रतीक्षा में है।

नई नीति में प्रशासकों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। खेल प्रशासकों पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि वे अपने खेलों के लिए बहुत कम काम करते हैं और अपने हितों पर अधिक ध्यान देते हैं।

नीति के अनुसार, "खेल क्षेत्र में नैतिक आचरण, निष्पक्षता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नियामक संस्थाएं गठित की जाएंगी ताकि खेल पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता और निर्बाध संचालन को बढ़ावा दिया जा सके।’’

इस नीति से भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) की बेचैनी बढ़ना तय है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खेल महासंघ इन नियामक संस्थाओं को स्वीकार करेंगे और इनमें शामिल होंगे।

आईओए अध्यक्ष पी टी उषा ने पहले ही किसी भी नियामक तंत्र के प्रति अपना विरोध व्यक्त कर चुकी हैं। उनका मानना है कि ऐसी प्रणाली को सरकारी हस्तक्षेप माना जा सकता है, जो आईओसी को स्वीकार नहीं है।

आईओसी ने भारत पर 2012 में प्रतिबंध लगाया था और भ्रष्टाचार के अलावा निलंबन का दूसरा कारण चुनाव प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप भी बताया गया था। उसने 2014 में नए चुनाव होने के बाद ही प्रतिबंध हटाया था।

नई नीति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एनएसएफ के लिए निगरानी तंत्र का उल्लेख भी किया गया है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 01, 2025 08:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).