BMC Election Result 2026: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में 'ठाकरे' साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शुक्रवार को आए नतीजों में स्पष्ट हो गया है कि उद्धव ठाकरे (Shiv Sena UBT) और राज ठाकरे (MNS) का ऐतिहासिक गठबंधन भी भाजपा-शिंदे गठबंधन (महायुति) के विजय रथ को रोकने में विफल रहा. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महायुति ने 130 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि ठाकरे भाइयों का गठबंधन 71 सीटों के आसपास सिमट गया है.
नहीं चला 'मराठी मानुष' और एकजुटता का कार्ड
दशकों की राजनीतिक दुश्मनी भुलाकर उद्धव और राज ठाकरे इस बार 'मराठी मानुष' के अधिकारों और मुंबई की अस्मिता के मुद्दे पर एक साथ आए थे. चुनावी गलियारों में चर्चा थी कि दोनों भाइयों के मिलने से शिवसेना का पारंपरिक वोट बैंक फिर से एकजुट हो जाएगा. हालांकि, चुनावी नतीजों ने इन अटकलों को खारिज कर दिया. मुंबई के मतदाताओं ने ठाकरे बंधुओं के भावनात्मक कार्ड के बजाय महायुति के विकास और बुनियादी ढांचे के वादों पर अधिक भरोसा जताया. यह भी पढ़े: BMC Election Result 2026: मुंबई में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद जश्न की तैयारी, दोपहर 3.30 बजे कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे देवेंद्र फडणवीस
गढ़ों में भी मिली मात
हैरानी की बात यह रही कि दक्षिण मुंबई और मध्य मुंबई के कई उन इलाकों में भी महायुति ने जीत हासिल की है, जिन्हें ठाकरे परिवार का अभेद्य किला माना जाता था. दादर, माहिम और परेल जैसे क्षेत्रों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना के जमीनी कार्यकर्ताओं को अपने पाले में करना उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हुआ.
महायुति का 'डबल इंजन' मॉडल सफल
बीजेपी और शिंदे गुट की इस बड़ी जीत के पीछे 'डबल इंजन' सरकार के कार्यों को श्रेय दिया जा रहा है. मेट्रो लाइनों का विस्तार, कोस्टल रोड परियोजना और धारावी पुनर्विकास जैसे मुद्दों ने शहरी मतदाताओं को महायुति की ओर आकर्षित किया. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की जोड़ी ने आक्रामक प्रचार के जरिए यह संदेश देने में सफलता पाई कि विकास केवल उनके साथ ही संभव है.
विपक्ष के लिए अब आगे क्या?
इस हार के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के राजनीतिक भविष्य और उनके गठबंधन की निरंतरता पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं. बीएमसी पर करीब 30 साल तक राज करने वाली शिवसेना (अविभाजित) के लिए यह पहला मौका है जब उसे अपने ही घर में इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. अब विपक्षी खेमे में इस बात को लेकर आत्ममंथन शुरू हो गया है कि क्या केवल 'ठाकरे' नाम का सहारा अब मुंबई की सत्ता पाने के लिए पर्याप्त नहीं है.













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