कासरगोड (केरल), छह सितंबर केशवानंद भारती का रविवार को यहां निधन हो गया। उनकी याचिका पर ही उच्चतम न्यायालय ने ‘संविधान के मूल ढांचे’ के बारे में ऐतिहासिक निर्णय दिया था।
सत्तर के दशक के प्रारंभ में इस मामले की सुनवाई 68 दिनों तक चली थी और यह उच्चतम न्यायालय में चली अब तक की सबसे लंबी कार्यवाही थी। सुनवाई पीठ में 13 न्यायाधीश शामिल थे, जो शीर्ष न्यायालय में अब तक की सबसे बड़ी पीठ थी।
उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने केरल के 79 वर्षीय संत के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि लोगों के प्रति अपनी सेवा को लेकर वह याद रखे जाएंगे।
पुलिस ने बताया कि केरल निवासी संत केशवानंद भारती श्रीपदगलवरु का वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों के चलते यहां एडनीर मठ में निधन हो गया।
पुलिस ने कहा, ‘‘ हमें मिली सूचना के मुताबिक रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उनका निधन हुआ।’’
दिवंगत संत को मठ में विभिन्न तबके और हर क्षेत्र के लोगों ने श्रद्धांजलि दी। वह इस मठ के पांच दशक पहले प्रमुख बने थे।
उल्लेखनीय है कि चार दशक पहले भारती ने केरल भूमि सुधार कानून को चुनौती दी थी,जिसने यह सिद्धांत स्थापित किया कि ‘उच्चतम न्याालय संविधान के मूल ढांचे का संरक्षक है’ और 13 न्यायधीशों की पीठ ने फैसला सुनाया, जो शीर्ष न्यायालय में अब तक की सबसे बड़ी पीठ थी।
हालांकि, केशवानंद को वह राहत नहीं मिली जो वह चाहते थे, लेकिन यह मामला अपने ऐतिहासिक फैसले को लेकर महत्वपूर्ण हो गया जिसने संविधान में संशोधन की संसद की व्यापक शक्तियों में कटौती कर दी। साथ ही, न्यायपालिका को किसी भी संविधान संशोधन की समीक्षा करने की शक्ति भी प्रदान कर दी।
मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के. चंद्रू ने पीटीआई से कहा, ‘‘ ‘‘केशवानंद भारती मामले का महत्व इसके इस फैसले की वजह से है कि संविधान में संशोधन किया जा सकता है, लेकिन इसके ‘‘मूल ढांचे’’ में नहीं।’
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