तिरुवनंतपुरम, 12 मई केरल में एक युवा डॉक्टर की दो दिन पहले हुई हत्या को लेकर विपक्षी दलों और चिकित्साकर्मियों के निशाने पर आई राज्य सरकार ने शुक्रवार को उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की जिनमें उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर विचार के लिए एक समिति का गठन भी शामिल है।
केरल के कोट्टयम जिले की रहने वाली डॉ. वंदना दास अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं और कोल्लम जिले के तालुक अस्पताल में कार्यरत थी जहां उन पर चाकू से हमला किया गया। बाद में दास की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इस घटना के खिलाफ राज्य के विभिन्न अस्पतालों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और स्वास्थ्य कर्मियों, मेडिकल इंटर्न, छात्र और हाउस सर्जन सड़कों पर आ गए।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता चिकित्सा सेवा सचिव करेंगे और स्नातकोत्तर छात्रों और हाउस सर्जन द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर विचार करने के बाद एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
उन्होंने बताया कि जल्द ही अन्य अस्पतालों में काम करने वालों के लिए मेडिकल रेजीडेंसी कार्यक्रम के तहत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. दास अजीजिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बतौर हाउस सर्जन पदस्थ थीं लेकिन प्रशिक्षण के तहत कोट्टरक्करा तालुक अस्पताल में कार्य कर रही थीं।
जॉर्ज ने यहां जारी बयान में कहा कि समिति हाउस सर्जन को आ रही समस्याओं पर विचार करेगी जिसके आधार पर रेजीडेंसी नियमावली के आधुनिकीकरण हेतु कदम उठाए जाएंगे।
यहां जारी बयान के मुताबिक मंत्री ने संबंधित विभागों के प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि चिकित्सा छात्रों को पर्याप्त अवकाश मिले। यह निर्देश उन्होंने स्नातकोत्तर छात्रों और हाउस सर्जन के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को दी।
जॉर्ज ने डॉक्टरों से विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार मजबूती से चिकित्सा पेशेवरों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य कर्मियों पर अब हमला नहीं होना चाहिए। कड़े कदम उठाए जाएंगे। चिकित्सा महाविद्यालयों में जन घोषणा प्रणाली स्थापित की जाएगी।’’
इस बीच, डॉ. दास के सहकर्मियों ने अस्पतालों में पर्याप्त एहतियाती कदम उठाने में कथित नाकामी को लेकर शुक्रवार को सरकार और पुलिस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस अस्पताल में हमला हुआ, अगर वहां पर्याप्त सुविधा होती तो उनकी सहकर्मी की जान बचाई जा सकती थी।
डॉक्टरों ने संवाददाताओं से कहा कि यह प्रशासनिक प्रणाली की नाकामी है। उन्होंने विरोध को शांत कराने की कोशिश के तहत अस्पताल के नए ब्लॉक का नाम डॉ. वंदना दास के नाम पर रखने की स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा की भी आलोचना की।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने भी इस मामले पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शीर्ष अधिकारियों के साथ ही सरकार, पुलिस का बचाव करने की कोशिश कर रही है जबकि उक्त घटना ने पूरे बल के लिए असहज स्थिति उत्पन्न की है।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘पूरे बल के लिए असहज स्थिति उत्पन्न करने वाली इस घटना पर मुख्यमंत्री क्यों अब तक चुप हैं?’’
सतीशन ने प्राथमिकी दर्ज करने में बड़े स्तर पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या राज्य के लोगों का पुलिस पर भरोसा होगा अगर हत्या के मामले की प्राथमिकी ‘गलत तरीके’ से लिखी गई है।
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