कोच्चि, दो फरवरी केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने रविवार को कहा कि गहरे समुद्र के अप्रयुक्त संसाधनों के दोहन के लिए भारत के अनुसंधान और विकास प्रयासों ने यहां जारी मत्स्य मेला के दौरान लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
सीएमएफआरआई ने कहा कि सोमवार को समाप्त होने वाले इस उत्सव में प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, क्रेता-विक्रेता बैठक, समुद्री भोजन उत्सव और कई कार्यशालाओं का आयोजन शामिल है।
संस्थान द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोमवार को समुद्री जीवन पर एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह कार्यक्रम आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान में आयोजित किया जा रहा है।
दो सौ से 2,000 मीटर की गहराई तक फैले गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के वाणिज्यिक दोहन की काफी संभावना है।
विज्ञप्ति के अनुसार, समुद्र में 200 से 1,000 मीटर की गहराई में मौजूद ये संसाधन दुनिया में बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त हैं।
इसमें कहा गया है कि समुद्र में इतनी गहराई में पाई जाने वाली ये मछलियां ‘फैटी एसिड’ और ‘लिपिड’ से भरपूर होती हैं तथा औद्योगिक एवं फार्मास्यूटिकल अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विज्ञप्ति के मुताबिक, इस पहल को और अधिक गति मिली है, क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आम बजट में गहरे समुद्र के संसाधनों के दोहन से जुड़े केंद्र सरकार के प्रयास का उल्लेख किया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY