उन्होंने कहा कि कश्मीर में परिवर्तन की बयार बही है और जिन हाथों में पत्थर दिया जाता था, उन्हें अब रोजगार दिया जा रहा है।
उन्होंने मराठा आरक्षण के मसले के हल का केंद्र सरकार से आग्रह किया और कहा कि केंद्र को किसी का हक खत्म किये बिना राज्य सरकार के साथ परामर्श करके इस विवाद का निपटारा करना चाहिए।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के ए. एम. आरिफ ने कहा कि यह विधेयक कुछ और नहीं, बल्कि कश्मीर के मुद्दे को जीवित रखने और चुनावी लाभ कमाने का जरिया मात्र है।
उन्होंने संशोधन के जरिये ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान किये जाने को चुनावी हथकंडा करार दिया।
रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन. के. प्रेमचंद्रन ने जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त करने के खिलाफ दायर याचिकाओं के उच्चतम न्यायालय में लंबित रहने के बावजूद संसद में संशोधन के सरकार के औचित्य पर सवाल खड़े किये।
उन्होंने दोनों संशोधन विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि आखिरकार इस सरकार को शीर्ष अदालत में लंबित याचिकाओं के बावजूद संशोधन विधेयक का क्या अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के इरादे पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि वह केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा के चुनाव की प्रक्रिया के लिए तैयार क्यों नहीं है? उन्होंने कहा, ‘‘आप जनवादी सरकार पर भरोसा नहीं करते हैं इसलिए
आप उपराज्यपाल के माध्यम से शासन जारी रखना चाहते हैं।’’
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने भी संशोधन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि जन प्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के भी विरुद्ध है।
उन्होंने पूछा कि ‘‘जब हर रोज मेजर और कर्नल सहित सेना के अधिकारी मारे जा रहे हैं तो सरकार कैसे दावा कर रही है कि वहां सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त है।’’
कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल ने जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने में देरी पर सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद यह संदेश दिया गया कि इससे जम्मू कश्मीर में शांति आएगी और विकास का रास्ता खुलेगा, लेकिन हकीकत यह है कि वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति ही नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था भी बुरी स्थिति में है।
उन्होंने कश्मीर में बड़े उद्योग लगाने की आवश्यकता जताई।
भाजपा के जगदम्बिका पाल ने पांच अगस्त 2019 से पहले तत्कालीन राज्य की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुखद है कि 26 जनवरी 1950 को भी वहां के उच्च न्यायालय में तिरंगा नहीं फहराया जा सका था, लेकिन अब हर जगह तिरंगा लहरा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘अपनी माटी अपना देश’ कार्यक्रम में जुटी युवाओं की भीड़ यह दर्शाती है कि जम्मू कश्मीर के नागरिक अतीत की परछाइयों से निकलकर विकास के रास्ते पर बढ़ चले हैं।
चर्चा अधूरी रही।
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