चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की चिंता अनुराधा ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि इस समुदाय के शैक्षणिक और आर्थिक विकास पर विशेष जोर देने की जरूरत है।
वहीं, शिवसेना के राहुल शिवाले ने कहा कि महाराष्ट्र के धनगड़ समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें आरक्षण मिल सके।
उन्होंने कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा पर पुनर्विचार करने की जरूरत है ताकि मराठा और अन्य समुदायों को इसका लाभ मिल सके।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए बीजू जनता दल के अच्युतानंद सामंत ने ओडिशा में कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग की।
जनता दल (यूनाइटेड) के दिलेश्वर कमैत ने कहा कि बिहार की कई जातियां हैं, जिन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल किया जाना चाहिए।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कुंवर दानिश अली ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आदिवासी समुदाय के लोगों को विस्थापित करके कुछ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है।
अली ने कहा कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए ताकि जिसकी जितनी आबादी हो, उसे उतनी हिस्सेदारी मिल सके।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र के धनगड़ समुदाय के आरक्षण की मांग को लेकर न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा के तापिर गाव ने पूर्वोत्तर के कुछ समुदायों को एसटी का दर्जा देने की मांग की।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ए एम आरिफ ने निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा कि सरकार को अनुसूचित जाति से संबंधित अलग-अलग विधेयक लाने के बजाय एक समग्र विधेयक लाना चाहिए था।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि अनुसूचित जनजातियों के संदर्भ में समग्र विधेयक लाना चाहिए ताकि उनसे जुड़े सभी मुद्दों का समाधान हो सके।
भाजपा के जुएल ओराम ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्यों की सिफारिश को अंतिम माना जाना चाहिए।
उन्होंने जनजातियों के नाम में स्पेलिंग संबंधी विसंगति के कारण उन्हें लंबे समय तक सूची में शामिल नहीं किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुसूची को तीन ओं में प्रकाशित किया जाना चाहिए जिसमें मूल नाम अंग्रेजी में नहीं, हिंदी में होना चाहिए और इसमें क्षेत्रीय में भी नाम लिखा जाए।
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