देश की खबरें | कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पाठ्य पुस्तकों की समीक्षा के लिए नयी समिति गठित करने से इंकार किया

चित्रदुर्ग (कर्नाटक), चार जून कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने पाठ्य पुस्तकों की समीक्षा के लिए एक नयी समिति गठित करने से शनिवार को इनकार कर दिया।

मुख्यमंत्री का यह बयान पाठ्य पुस्तक समीक्षा समिति प्रमुख रोहित चक्रतीर्थ द्वारा कुछ साल पहले किये गये विवादित ट्वीट और बुद्धिजीवियों के लेखन को बाहर करने को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है।

चक्रतीर्थ वर्ष 2016 में किए गए अपने ट्वीट की वजह से विभिन्न वर्गों की आलोचना का सामना कर रहे हैं। उन्होंने उक्त ट्वीट में कथित तौर पर ‘‘नाद गाण’’ (कर्नाटक का राज्य गाण) का माखौल उड़ाया था। साथ ही, राज्य के कुछ बुद्धिजीवियों के लेखों को हटाने को लेकर भी विवाद है।

मुख्यमंत्री बोम्मई ने जिले के हिरियुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘नहीं, नयी पाठ्य पुस्तक समीक्षा गठित करने का कोई सवाल ही नहीं है।’’

पाठ्य पुस्तकों में 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर पर अध्याय शामिल करने के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विभिन्न लिंगायत मठों के महंतों के साथ चर्चा करेंगे।

बोम्मई ने दावा किया, ‘‘हमारी सरकार बसवेश्वर के सिद्धांतों पर चलती है। बसवेश्वर के कई श्रेष्ठ ‘वचन’ (लेख) हैं। बरगुर रामचंद्र नीत पाठ्य पुस्तक समीक्षा समिति का गठन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2015 में किया था और अब गठित पाठ्य पुस्तक समिति में केवल एक वाक्य का अंतर है, बाकी सब समान है।’’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) संस्थापक केशव बलिराम हेडगवार पर अध्याय के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्याय को हटाया नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘उसमें गलत क्या है? मैंने पाठ्य पुस्तक समिति से कहा कि अगर उन्हें किसी असमानता की जानकारी होती है तो हम उसे गंभीरता से लेंगे।’’

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