बेंगलुरू, 11 जुलाई कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एच पी संदेश ने सोमवार को उन्हें तबादले की धमकी के बारे में एक अन्य मौजूदा न्यायाधीश द्वारा सूचित किए जाने के संबंध में अपनी पिछली टिप्पणियों को रिकॉर्ड में रखा।
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक हरनहल्ली ने अभिवेदन दिया कि न्यायमूर्ति संदेश द्वारा की गईं टिप्पणियों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। उन्होंने कहा कि याचिका मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और इसलिए स्थगन दिया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भी एक ज्ञापन दायर किया, जिसमें कहा गया कि शीर्ष अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है और इसने स्थगन का आग्रह किया।
अदालत ने बाद में पिछली सुनवाई में दिए गए मौखिक बयानों को दर्ज किया, जिसमें टिप्पणियों के कारण उन्हें स्थानांतरण की धमकी का सामना करना पड़ा था। न्यायमूर्ति संदेश ने कहा, "अदालत को धमकी नहीं दी जा सकती। यह न्याय के प्रावधान में हस्तक्षेप करने के समान है। मैंने इसे पहले ही संबंधित... को बता दिया है।"
वरिष्ठ अधिवक्ता ने जब धमकी के बारे में सूचित करने वाले न्यायाधीश का नाम पूछा तो न्यायमूर्ति संदेश ने कहा कि उनसे किसी का नाम लेकर गलती करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि चूंकि वह उनकी बातों पर संदेह कर रहे हैं, इसलिए वह इसे रिकॉर्ड में रखेंगे।
उन्होंने कहा, "जब इस मामले की सुनवाई 29 जून, 2022 को हुई, तो इस अदालत ने वास्तविक अभियुक्तों को पकड़ने में एसीबी की ओर से निष्क्रियता पाई और वास्तविक दोषियों को लाने में एसीबी की ओर से निष्क्रियता के संबंध में टिप्पणी की तथा मामले को चार जुलाई, 2022 तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।"
न्यायमूर्ति संदेश ने कहा, "इस अदालत द्वारा एक जुलाई, 2022 को मुख्य न्यायाधीश को विदाई देने के लिए एक रात्रिभोज की व्यवस्था की गई थी। एक मौजूदा न्यायाधीश जो मेरे पास आए और बैठे, उन्होंने दिल्ली से एक फोन आने की बात बताई और कहा जिस व्यक्ति ने दिल्ली से फोन किया, उसने मेरे बारे में पूछताछ की।"
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायाधीश यहीं नहीं रुके और कहा कि एडीजीपी उत्तर भारत से है और वह ताकतवर है। उन्होंने तबादले का एक उदाहरण भी दिया...।’’
इसके बाद कुछ समय के लिए अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग रोक दी गई और सोमवार के आदेश का पाठ अपलोड होने का इंतजार किया जा रहा है।
इसके अलावा अदालत ने सोमवार के आदेश में एसीबी के एडीजीपी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को भी दर्ज किया जो उनके सेवा रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
न्यायमूर्ति संदेश एक उप तहसीलदार की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं जो बेंगलुरु शहरी उपायुक्त (डीसी) कार्यालय में कार्यरत था। इस याचिका पर सुनवाई के बाद तत्कालीन डीसी को भी मामले में गिरफ्तार किया गया है।
एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह के खिलाफ की गई टिप्पणी भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है। सिंह ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अपने और एसीबी के खिलाफ टिप्पणी को हटाने का आग्रह किया है।
सोमवार के आदेश में, अदालत ने राज्य को एसीबी जैसी भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों में दागी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं करने का भी निर्देश दिया।
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