ताजा खबरें | न्याय संहिता चर्चा दो लोस

राम ने कहा, ‘‘लेकिन पिछले चार वर्षों के परिश्रम का नतीजा है कि ये तीनों विधेयक सदन के पटल पर रखे जा सके हैं।’’

उन्होंने 90 दिनों की निर्धारित अवधि में मामले की जांच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी तय किये जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा, ‘‘जो (अधिकारी) संबंधित प्रावधानों के तहत नहीं चलते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था की जानी चाहिए।’’

भाजपा सदस्य ने कहा कि मिलावटी खाद्यान्न से संबंधित अपराधों और फर्जी अधिकारी बनकर अपराध करने वालों के खिलाफ सजा पहले की तुलना में कम कर दी गयी है, जिसे बढ़ाया जाना चाहिए।

लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेएसपी) के प्रिंस राज ने तीनों विधेयकों को स्वदेशी मसौदा कानून की संज्ञा देते हुए कहा कि ‘स्वदेशी सदन में स्वदेशी कानून’ का उद्देश्य संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करते हुए न्याय प्रदान करना है।

भाजपा के ही एलएस तेजस्वी सूर्या ने इन विधेयकों की प्रमुख विशेषताओं में ‘जीरो प्राथमिकी, ई-प्राथमिकी और मामला दर्ज करने को अनिवार्य बनाना’ को गिनाया।

उन्होंने कहा कि संसद से मंजूर होने के बाद ये ‘भारत में, भारत द्वारा और भारत के लिए’ बने कानून होंगे, जिनसे दोषसिद्धि दर भी बढ़ेगी और निर्दोषों को संरक्षण भी मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर में भारतीय दंड संहिता के स्थान पर रणबीर पैनल एक्ट लागू होता था, लेकिन अनुच्छेद 370 हटने के बाद नये मसौदा कानून जम्मू-कश्मीर सहित देश के सभी हिस्सों में लागू होंगे।

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