लखनऊ, 21 अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने समाज में सद्भावना बिगाड़ने संबंधी कथित सोशल मीडिया पोस्ट करने के मामले में जेल में बंद पत्रकार प्रशांत कनौजिया की जमानत अर्जी बुधवार को मंजूर कर ली।
यह आदेश न्यायमूर्ति ए आर मसूदी की एकल पीठ ने कनौजिया की जमानत अर्जी पर पारित किया।
याची के खिलाफ समाज में सद्भावना बिगाड़ने संबंधी पेास्ट करने के कारण हजरतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी जिसके बाद 18 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
कनौजिया के खिलाफ हजरतगंज पुलिस थाने में 17 अगस्त को मामला दर्ज कराया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से एक आपत्तिजनक पोस्ट की थी।
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सब इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शुक्ला ने मामला दर्ज कराते हुये कहा था कि 17 अगस्त को उन्होंने देखा कि प्रशांत कनौजिया ने अपने टि्वटर हैंडल से राम मंदिर के बारे में एक पोस्ट साझा की थी और कहा गया था कि यह हिन्दू सेना के प्रमुख सुशील तिवारी के कहने पर की गयी थी जबकि तिवारी ने इस बात का खंडन किया था।
शुक्ला ने मामला दर्ज कराते हुये कहा था कि यह पोस्ट तिवारी की छवि को धूमिल करने और विभिन्न समुदायों में वैमनस्य फैलाने, सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली है जिससे शंति भंग हो सकती है।
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