नयी दिल्ली, 26 सितंबर एक सरकारी रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि अगर उत्तराखंड के जोशीमठ के भूधंसाव वाले क्षेत्र में प्रभावित परिवारों के पास वैध भूमि-स्वामित्व दस्तावेज नहीं है या अवैध रूप से कब्जा कर इमारत बनाई गई है, तो वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जानी चाहिए।
रिपोर्ट में भूमि-उपयोग मानचित्रों में ‘नो-बिल्डिंग जोन’ को नामित करने और आपदा होने पर ऐसे जोन में निर्मित इमारतों को कोई अनुदान नहीं देने की भी सिफारिश की गई है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, भूधंसाव कई वर्षों से देखा गया था, लेकिन 2-8 जनवरी तक यह अधिक गंभीर रूप लेता गया।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान और अन्य एजेंसियों के पेशेवरों की एक 35 सदस्यीय टीम ने क्षति का आकलन करने के लिए अध्ययन किया।
भविष्य की आपदाओं को रोकने के लिए रिपोर्ट उचित दस्तावेजीकरण और भवन नियमों के अनुपालन के महत्व पर जोर देती है।
एजेंसियों ने जोशीमठ के लोगों को शहर के असुरक्षित क्षेत्रों के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, जहां किसी भी नये निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
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