देश की खबरें | रासुका के तहत बंद हिंसा के आरोपी जावेद सिद्दीकी की हिरासत रद्द

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस वर्ष जौनपुर में दलितों के खिलाफ हिंसा करने के आरोपी जावेद सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति की रासुका के तहत हिरासत के आदेश को सोमवार को रद्द कर दिया। अदालत ने सिद्दीकी के किसी अन्य मामले में वांछित नहीं होने की स्थिति में उसे तत्काल रिहा किए जाने का निर्देश दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

प्रयागराज, सात दिसंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस वर्ष जौनपुर में दलितों के खिलाफ हिंसा करने के आरोपी जावेद सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति की रासुका के तहत हिरासत के आदेश को सोमवार को रद्द कर दिया। अदालत ने सिद्दीकी के किसी अन्य मामले में वांछित नहीं होने की स्थिति में उसे तत्काल रिहा किए जाने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की पीठ ने जौनपुर के स्थानीय नेता जावेद सिद्दीकी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर ली।

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नौ जून, 2020 को जौनपुर के भदेठी गांव में बच्चों के बीच झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया जिसके बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया और दलितों की एक दर्जन से अधिक झुग्गियां जला दी गईं और दलितों के अन्य 14 मकानों को भारी नुकसान पहुंचा। जावेद और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

प्राथमिकी के मुताबिक, नौ जून को जावेद 80 लोगों के साथ भदेठी गांव की झुग्गी बस्ती में गया था और उसने दंगा, आगजनी की और झुग्गी के निवासियों के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का उपयोग किया था।

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बाद में, जावेद को 10 जुलाई को गिरफ्तार किया गया और जौनपुर के जिलाधिकारी द्वारा उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) की धारा 3(2) के तहत हिरासत का आदेश पारित किया गया।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, “उसे हिरासत के आदेश को चुनौती देने के लिए लखनऊ के यूपी सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। ना ही समय पर सलाहकार बोर्ड के समक्ष प्रस्तुति देने का अवसर दिया गया और ना उसे रासुका के तहत हिरासत के संबंध में संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।”

अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने में असाधारण जल्दबाजी दिखाई गई। अधिकारी खिलाफ बने रहे और उनकी तरफ से पूर्ण निष्क्रियता दिखाई गई जिससे जावेद को पक्ष रखने में अनुचित विलंब हुआ।”

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