किशिदा ने कहा कि चीन, उत्तर कोरिया और अब रूस का सामना करने की क्षमता हासिल करने पर जापान तेजी से विचार करेगा। हालांकि, आलोचकों ने किशिदा की इस योजना को विवादास्पद करार देते हुए कहा है कि यह जापान के संविधान के खिलाफ है, जिसमें युद्ध से बचने की बात कही गई है।
किशिदा ने सिंगापुर में एशियाई सुरक्षा फोरम 'शंगरी-ला डायलॉग' में कहा, ''आज यूक्रेन तो कल पूर्वी एशिया के साथ ऐसा हो सकता है।''
किशिदा ने क्षेत्रीय साझेदारों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया और कहा कि अगले वसंत तक ''शांति के लिए स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत'' योजना लेकर आएंगे, जिसके तहत जापान दक्षिणपूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में स्थित देशों को उनकी सुरक्षा के लिये विकास सहायता, गश्ती नौका, समुद्री कानून लागू करने की क्षमता और अन्य तरह की मदद प्रदान करेगा।
ये वे क्षेत्र हैं, जहां चीन अपना प्रभाव बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि जापान कम से कम 20 देशों को इस तरह की सहायता प्रदान करेगा। साथ ही कम से कम 800 समुद्री सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित करेगा और अगले तीन वर्षों में लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान करेगा।
किशिदा पहले ही जापान की सैन्य क्षमताओं और खर्च को बढ़ाने का संकल्प ले चुका है।
एशिया में अपनी सुरक्षा भूमिका का विस्तार करने का जापान का प्रयास एक संवेदनशील मुद्दा है। इस क्षेत्र के कई देशों को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
किशिदा ने अपने संबोधन के दौरान आश्वासन दिया कि जापान की रक्षा वृद्धि पारदर्शी होगी और इसके संविधान के दायरे में रहेगी।
उन्होंने कहा कि पूर्वी और दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास बढ़ते तनाव के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल बिगड़ रहा है। पूर्वी और दक्षिण चीन सागर और ताइवान पर चीन अपना दावा जताता रहा है।
एपी
जोहेब दिलीप
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