जम्मू, एक नवम्बर जम्मू कश्मीर के आबकारी घोटाले में 24 साल की कानूनी लड़ाई के बाद एक सेवानिवृत आईएएस अधिकारी एवं चार सरकारी कर्मियों समेत 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी।
जम्मू की अपराध शाखा के प्रवक्ता के अनुसार सरकार द्वारा मैसर्स कुलदीप सिंह एवं कंपनी को आवंटित की गयी शराब की दुकानों के अनुबंध निविदा भुगतान से जुड़े घोटाले के कारण सरकारी खजाने को लगभग तीन करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
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इस कंपनी को बैंकों और आबकारी विभाग के खजाने में 13.23 करोड़ रुपये जमा करने थे। शराब के परमिट को हासिल करने के लिए आबकारी कार्यालय में रसीद और वाउचर जमा किया जाना था।
अधिकारी के अनुसार लेकिन जम्मू के आबकारी उपायुक्त ने रसीदों और वाउचरों में कुछ विसंगतियां पायीं और उन्होंने उसके सत्यापन का आदेश दिया। कंपनी द्वारा भुगतान की गयी राशि और आबकारी कार्यालय में सौंपे गये वाउचरों में अंतर पाया गया।
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प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आरोपी ने आबकारी शुल्क के नाम पर बैंक में राजस्व के तौर पर एक लाख रुपये जमा कराये लेकिन उसने वाउचर पर एक शून्य और बढ़ा दिया ताकि वह 10 लाख रुपये लगे।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘यह अवैध धंधा साल भर चलता जिससे आबकारी विभाग को सीधे और राज्य के सरकारी खजाने को परोक्ष रूप से तीन करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।’’
प्रवक्ता ने बताया कि मामला दर्ज करने के बाद आरोपियो में से छह की मौत हो चुकी है जिनमें दो सरकारी कर्मी तथा कंपनी के चार शेयरधारक हैं। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘अपराध शाखा की 24 साल की कानूनी लड़ाई और सरकार के अतिरिक्त सरकारी वकील द्वारा प्रतिनिधित्व किये जाने के बाद आरोप निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हुई। इस मामले को एक अन्य मामले के साथ संलग्न कर दिया गया है जिसे तब सतर्कता विभाग ने दर्ज किया था।’’
उन्होंने बताया कि जम्मू के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ताहिर खुर्शीद रैना ने आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।
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