जम्मू, छह मई आतंकवादी हमले में सेना के पांच पैरा कमांडो की मौत के खिलाफ शनिवार को दूसरे दिन भी जम्मू भर में पाकिस्तान विरोधी कई प्रदर्शन हुए। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) प्रमुख गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को उखाड़ फेंकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय विधिज्ञ संघ से जुड़े अधिवक्ताओं ने अदालत परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया और राजौरी जिले में शुक्रवार को एक सैन्य अभियान के दौरान सैनिकों की हत्या किये जाने की निंदा की।
विधिज्ञ संघ के महासचिव परवेश सिंह सलारिया ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य भारत में सीमा-पार आतंकवाद को लगातार मिल रहे पाकिस्तानी समर्थन के खिलाफ कड़ा विरोध जताना था।
शिवसेना डोगरा फ्रंट, राष्ट्रीय बजरंग दल और ‘इक्कजुट्ट जम्मू’ ने भी शहर में अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए जिसमें सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
पूर्व मुख्यमंत्री आजाद ने यहां एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘पांच सैनिकों की हत्या इस साल राजौरी जिले में तीसरी बड़ी घटना है। समग्र सुरक्षा हालात नियंत्रण में है और उग्रवाद लगभग समाप्त हो गया है। लेकिन राजौरी और पुंछ क्षेत्र की घटनाएं हम सभी के लिए चिंता का कारण हैं।’’
आजाद ने कहा कि सभी लोगों को आतंकवाद की उच्चतम स्तर पर आलोचना करनी चाहिए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि आतंकी हमले में जवानों के सर्वोच्च बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है और जल्द ही सशस्त्र बलों द्वारा आतंकवादियों को करारा जवाब दिया जाएगा। शर्मा अखनूर में पैराट्रूपर नीलम सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता जहानजेब सिरवाल भी सैनिक के अंतिम संस्कार में शामिल हुए और कहा कि अक्सर हो रहे आतंकवादी हमले केंद्रशासित प्रदेश की जमीनी हकीकत को दर्शाते हैं।
सिरवाल ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को देश को स्पष्टीकरण देना चाहिए, क्योंकि यह दावा करती रही है कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद आतंकवाद समाप्त हो गया है।
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