नयी दिल्ली, 24 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इस दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर निम्मनगड्डा रमेश कुमार को बहाल करने के उच्च न्यायालय के निर्देश को लागू कराने के लिये राज्यपाल को दखल देना पड़ा।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रह्मण्यम की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिये दायर आवेदन पर नोटिस जारी किया। पीठ ने कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को नोटिस का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल को उच्च न्यायालय के फैसले के बाद रमेश कुमार को राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर बहाली के लिये हस्तक्षेप करना पड़ा। वहां अवमानना कार्यवाही (आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ) चल रही है। यह सब क्या है?’’
कुमार की ओर से पेश हरीश साल्वे ने कहा कि उच्च न्यायालय में चल रही अवमानना कार्यवाही के बारे मे हलफनामे पर कुछ अतिरिक्त तथ्य सामने लाने के लिये एक सप्ताह का समय चाहिए।
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उन्होंने कहा कि कुमार को बहाल करने के उच्च न्यायालय के निर्देश पर अमल नहीं किया गया और अब उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की है।
साल्वे ने कहा कि कुमार की बहाली का फैसला सुनाये जाने के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के बारे में कुछ अनुचित टिप्पणियां की गयी थी।
राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ को आश्वासन दिया कि उच्च नयायालय के फैसले पर अमल किया जायेगा।
शीर्ष अदालत में कुछ और तथ्य रिकार्ड पर लाने के लिये आवेदन दायर करने वाले रमेश कुमार ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 17 जुलाई को उनकी अवमानना याचिका पर उन्हें अपनी बहाली के आदेश पर अमल के लिये राज्यपाल के पास जाने की छूट प्रदान की थी।
उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के कार्यालय ने उन्हें सूचित किया कि राज्य सरकार को उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं।
कुमार ने कहा कि इस बीच राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में लंबित अवमानना की कार्यवाही पर रोक के लिये उच्चतम न्यायालय में एक आवेदन दायर किया।
शीर्ष अदालत ने आठ जुलाई को यह संकेत दिया था कि वह उच्च न्यायालय द्वारा निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल घटाने संबंधी अध्यादेश निरस्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सहित कुछ याचिकाओं का अगले कुछ सप्ताह में निस्तारण कर देगी।
न्यायालय ने कहा था कि वह इस मामले में कोई अंतरिम आदेश नहीं देगा और इन याचिकाओं का अगले दो तीन सप्ताह में निरस्तारण कर देगा। इससे पहले, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी थी कि इस बीच राज्यपाल से अंतरिम राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने का अनुरोध किया जा सकता है क्योकि राज्य में चुनाव का काम रूका हुआ है।
शीर्ष अदालत ने 10 जून को अध्यादेश निरस्त करने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।
वाईएसआर कांग्रेस सरकार ने 10 अप्रैल को आंध्र प्रदेश पंचायत राज कानून, 1994 में एक अध्यादेश के माध्यम से संशोधन करके राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पांच साल से घटाकर तीन साल कर दिया था और रमेश कुमार को उनके पद से हटा दिया था।
ा अनूप
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