जरुरी जानकारी | ई-कॉमर्स निर्यात बढ़ाने के लिए बैंकिंग मुद्दों का समाधान जरूरीः रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 18 सितंबर वैकल्पिक तरीकों से मिली विदेशी मुद्रा के प्रसंस्करण में हिचकिचाहट और उच्च प्रसंस्करण शुल्क जैसे बैंकिंग मुद्दे ई-कॉमर्स के जरिये निर्यात की वृद्धि को प्रभावित कर रहे हैं और इस सोच को बदलने की जरूरत है। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2030 तक भारत से ई-कॉमर्स निर्यात को 350 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए इसकी वृद्धि की राह में मौजूद बैंकिंग गतिरोधों को दूर करने की जरूरत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘बैंकिंग से जुड़े इन मुद्दों के कारण वृद्धि पर असर पड़ने के अलावा परिचालन लागत भी बढ़ जाती है। इस स्थिति को बदलने के लिए रिजर्व बैंक और बैंकों दोनों को ही छोटे मूल्य वाले निर्यात की तरफ अपनी सोच केंद्रित करनी होगी। यह बदलाव दुरुपयोग रोकने के अलावा प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने के लिए भी जरूरी है।’’

रिपोर्ट कहती है कि छोटे ई-कॉमर्स कारोबार को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि बैंक कम मूल्य वाले लेनदेन को कारगर तरीके से संभाल पाने के लिए सक्षम नहीं हैं।

इसके मुताबिक, बैंकिंग समस्याओं में पेपाल, क्रेडिट कार्ड, वेस्टर्न यूनियन जैसे अलग भुगतान तरीकों से हासिल विदेशी मुद्राओं के प्रसंस्करण को लेकर बैंकों में कायम हिचक, उच्च प्रसंस्करण शुल्क और आरबीआई की निर्यात आंकड़ा प्रसंस्करण एवं निगरानी प्रणाली से जुड़ी सीमाएं शामिल हैं।

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