देश की खबरें | इसरो ने गगनयान मिशन के लिए ‘ह्यूमन-रेटेड’ ठोस रॉकेट वाहक का सफल परीक्षण किया

बेंगलुरु, 13 मई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में गगनयान कार्यक्रम के लिए ‘ह्यूमन-रेटेड’ ठोस रॉकेट वाहक (एचएस200) का सफलतापूर्वक स्थैतिक परीक्षण पूरा किया।

अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में बताया कि एचएस200 उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी एमके थ्री के एस200 रॉकेट वाहक का ‘ह्यूमन-रेटेड’ संस्करण है, जिसे एलवीएम-3 के नाम से जाना जाता है।

‘ह्यूमन-रेटेड’ संस्करण किसी अंतरिक्ष यान या प्रक्षेपण वाहन के प्रमाणन की प्रक्रिया है जो दर्शाती है कि यान मनुष्यों को सुरक्षित रूप से लेकर अंतरिक्ष में परिवहन करने में सक्षम है।

इसरो ने कहा, “इस परीक्षण का सफलतापूर्वक संपन्न होना इसरो के प्रतिष्ठित मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन-गगनयान के लिए एक अहम मील का पत्थर है, क्योंकि प्रक्षेपण यान के पहले चरण की पूरी अवधि के लिए इसके प्रदर्शन का परीक्षण किया गया है।”

इस मौके पर इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव एस सोमनाथ, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर और इसरो के अन्य वैज्ञानिक उपस्थित थे।

एचएस200 वाहक का डिजाइन और विकास तिरुवनंतपुरम स्थित वीएसएससी में पूरा किया गया और प्रणोदक ढलाई श्रीहरिकोटा स्थित एसडीएससी में पूरी की गई।

संबंधित एस200 मोटर, एलवीएम-3 प्रक्षेपण यान का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य जियोसिंक्रोनस स्थानांतरण कक्षा में 4,000 किलोग्राम वर्ग के उपग्रह को प्रक्षेपण करना है।

चंद्रयान मिशन सहित इस प्रक्षेपण यान के पूर्व के सफल प्रक्षेपणों के आधार पर, एलवीएम-3 को गगनयान मिशन के प्रक्षेपक के तौर पर चुना गया है।

बयान में कहा गया कि मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए एलवीएम-3 प्रक्षेपण यान में ‘ह्यूमन रेटिंग’ की आवश्यकताओं के अनुसार सुधार किए गए।

इसी के अनुरूप अन्य सभी प्रणालियों की तरह एस200 वाहक में विभिन्न प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से डिज़ाइन में कई सुधार किए गए।

बयान में कहा गया, “इस परीक्षण के सफलतापूर्वक संपन्न होने के साथ, इसरो गगनयान कार्यक्रम की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ गया है।”

इसरो ने कहा, “गगनयान कार्यक्रम, किसी भारतीय को अंतरिक्ष में ले जाने और उसे सुरक्षित वापस लाने के देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रयास के अंतिम लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।”

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