नयी दिल्ली, नौ दिसंबर भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ना रस के उपयोग पर प्रतिबंध के कारण मिलों को होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिए सरकार से बी और सी भारी शीरे से बने एथनॉल की कीमत में प्रतिपूरक वृद्धि की मांग की है।
सरकार ने सात दिसंबर को घरेलू गन्ना उत्पादन में संभावित गिरावट के कारण एथनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर-अक्टूबर) में एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस और चीनी सिरप के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, मासिक समीक्षा के अधीन बी और सी भारी शीरे और खाद्यान्न का उपयोग करने की अनुमति है।
इस्मा ने उपभोक्ताओं की जरूरतों को संतुलित करने की सरकार की मंशा को स्वीकार करते हुए संभावित व्यवधानों को कम करने और किसान का समर्थन करने के लिए विशिष्ट उपायों का प्रस्ताव दिया है।
बयान में कहा गया कि इस रोक के कारण, चीनी मिलों की पेराई क्षमता में भारी कमी आएगी, जिससे चीनी पेराई सत्र देर तक चलेगी। इसके परिणामस्वरूप न केवल मिलों को बल्कि किसानों को भी नुकसान होगा और उनके भुगतान में देरी होगी।
इस्मा ने कहा कि सरकार को बी और सी भारी शीरे से प्राप्त एथनॉल के मूल्य निर्धारण में प्रतिपूरक वृद्धि पर विचार करना चाहिए। इससे चीनी मिलों को किसानों के प्रति अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी प्रवाह सुनिश्चित होगा।
सरकार ने सी भारी शीरा से एथनॉल की कीमत 49.41 रुपये प्रति लीटर और बी भारी शीरा से 60.73 रुपये प्रति लीटर कीमत तय की है।
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