विदेश की खबरें | इराक के विस्थापित कुर्दों को घर लौटने की उम्मीद
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

उनकी उम्मीदें तब और बढ़ गईं जब कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी ने शनिवार को तुर्किये सरकार के खिलाफ 40 साल से जारी विद्रोह में संघर्ष विराम की घोषणा की।

अगर यह संघर्ष विराम लागू होता है तो यह न सिर्फ पड़ोसी तुर्किये के लिए एक अहम मोड़ होगा, बल्कि दोनों देशों की सीमा तक फैले अस्थिर क्षेत्र में भी जरूरी स्थिरता ला सकता है।

आदिल ताहिर कादिर 1988 में माउंट मतिन स्थित अपने गांव बारची से भाग गए थे, जब इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन ने क्षेत्र की कुर्द आबादी के खिलाफ अभियान शुरू किया था।

वह अब एक नए बने गांव में रहता है - जिसका नाम भी बारची है।

कादिर ने कहा कि अगर शांति आती है, तो वह तुरंत वापस चले जाएंगे।

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि यह काम करे ताकि हम वापस लौट सकें।”

अन्य विस्थापित सालिहा शिनो ने कहा, “ इस क्षेत्र के आसपास तुर्किये के कई ठिकाने हैं।”

उन्होंने कहा, "बमबारी हर दोपहर शुरू होती है और रात में तेज हो जाती है।”

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