ताजा खबरें | मामलों की जांच को दशकों तक नहीं लटकाया जा सकता : संसदीय समिति

नयी दिल्ली, 24 मार्च केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पास जांच के लिए लंबित 1,000 से अधिक मामलों का जिक्र करते हुए संसद की एक समिति ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘‘न्याय में देरी होना न्याय नहीं होने के समान होता है’’ और मामलों को दशकों तक नहीं लटकाया जा सकता।

समिति ने सीबीआई से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए एक खाका तैयार करने को कहा।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की अनुदानों की मांगों (2022-23) पर कार्मिक, लोक शिकायत एवं कानून व्यवस्था पर विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट में कहा गया कि लंबित मामलों के सवाल पर सीबीआई ने एक लिखित जवाब में कहा कि इस साल 31 जनवरी को 1,025 मामलों में जांच लंबित है, जिनमें से 66 में पांच साल से अधिक समय से लंबित है।

समिति ने कहा कि उसे लगता है कि अगर मानव संसाधन की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए तो लंबित मामलों को प्रभावी तरीके से कम किया जा सकता है।

समिति ने यह सिफारिश भी की कि सीबीआई को प्रतिनियुक्ति पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयास करने चाहिए और कम से कम पुलिस उपाधीक्षक स्तर तक के पदों पर स्थायी भर्ती के लिए काम करना चाहिए।

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