नयी दिल्ली, 21 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी को जांच स्थानांतरित करना एक गंभीर मामला है और पुलिस से सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने का आदेश केवल इसलिए पारित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि फैसला उसके पक्ष में नहीं होने पर याचिकाकर्ता गलत तरीके से पक्षपात महसूस करता है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि वह यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा की गई जांच से संतुष्ट हैं, जिसमें आरोप पत्र पहले ही दायर किया जा चुका है और संबंधित अधिकारियों ने याचिकाकर्ता महिला के प्रत्येक आरोप पर निष्पक्षता व उचित तरीके से गौर फरमाया है।
उच्च न्यायालय ने मामले में आगे की जांच दिल्ली पुलिस से सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग करने वाली महिला की याचिका खारिज कर दी और कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं रखा गया है, जिससे शहर की पुलिस द्वारा की गई जांच के संबंध में उसका विश्वास डगमगाया हो।
उच्च न्यायालय ने कहा, “सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने का आदेश केवल इसलिए पारित नहीं किया जा सकता है कि वादी फैसला अपने पक्ष में नहीं आने से गलत तरीके से पूर्वाग्रह से ग्रसित है।”
अदालत ने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी की ओर से कर्तव्य में या रिकॉर्ड में कोई लापरवाही बरतने की बात सामने नहीं आई है।
यह आदेश एक निजी कंपनी की एक पूर्व महिला कर्मचारी की याचिका पर आया, जिसने फर्म के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
उसने यह दावा करते हुए पुलिस से सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने की मांग की थी कि शहर के पुलिस अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के प्रयास नहीं किए और जांच में बड़ी खामियां थीं।
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